Meaning of

शु'ऊर

shu'oor • شعور

चेतना; जागरूकता; अनुभूति

consciousness; awareness; perception

شعور; آگہی; ادراک

Arabic

ऐ परिंदों आनकर बैठो सर-ए-शाख़-ए-अज़ा
हम दरख़्तों को शऊर-ए-मर्सिया ख़्वानी भी है

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रह-ए-तलब में किसे आरज़ू-ए-मंज़िल है
शुऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है

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बे-शऊरी की सनद है, तेरा चुभता लहजा
मैं तो शाइ'र हूँ, गुलाबों में सफ़र करता हूँ

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मदहोश है कोई तो कोई बे शुऊर है
हर दिल पे सुब्हो शाम ये कैसा सुरूर है

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न बोलने का सलीक़ा न देखने का श'ऊर
पसंद ख़ाक करेगा कोई भी तुम को हुज़ूर

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हम को सिखा रहे हैं मोहब्बत का वो शऊर
जिन को कि इश्क़ पढ़ना सिखाया था किसी रोज़

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ये तहज़ीब भी देखी है हम ने तुम ने
नाम अनिल है लेकिन उर्दू लिखता है

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ऐन ग़ैन नून है सुकून है
हसरतों का ख़ून है सुकून है

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ऐ परिंदों आनकर बैठो सर-ए-शाख़-ए-अज़ा
हम दरख़्तों को शऊर-ए-मर्सिया ख़्वानी भी है

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रह-ए-तलब में किसे आरज़ू-ए-मंज़िल है
शुऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है

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'शु'ऊर' मूल रूप से एक गहरी जागरूकता या चेतना को दर्शाता है जो केवल सतही अनुभूति से परे होती है। यह वह आंतरिक प्रकाश है जो मन को प्रकाशित करता है, जिससे व्यक्ति अस्तित्व की सूक्ष्मताओं को समझ पाता है। कविता में, यह शब्द अक्सर गहरी अंतर्दृष्टि और भावनात्मक गहराई का आह्वान करता है।

कवि अक्सर 'शु'ऊर' का उपयोग आत्म-जागरूकता और अस्तित्ववादी चिंतन के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह एक ऐसा शब्द है जो मूर्त और अमूर्त के बीच पुल बनाता है, मानव चेतना के सार को पकड़ता है।

कविता के क्षेत्र में, 'शु'ऊर' आत्मनिरीक्षण का एक प्रकाशस्तंभ है। यह पाठक को अपनी चेतना की गहराइयों में उतरने के लिए आमंत्रित करता है।