Meaning of

सोग़

sogh • سوغ

शोक; विलाप

mourning; lamentation

غم; ماتم

Persian

ख़ुशियों से भी मेरा पाला पड़ रक्खा
ग़म की हर सौग़ात समझ में आती है

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सौ मिलीं ज़िंदगी से सौग़ातें
हम को आवारगी ही रास आई

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कैसे बताऊँ मैं ये ग़म बस देते हो सौग़ात में
मुझ को नहीं अब चाहिए ये प्यार भी ख़ैरात में

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मुत्तहिद सौग़ात कर के कुल जहाँ की
हिन्द को सब कुछ ख़ुदा ने दे दिया है

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इशारों इशारों में फिर बात होगी
जो महफ़िल में उन सेे मुलाक़ात होगी

जब आएँगे आँखों में आँसू हमारी
सनम वो मोहब्बत की सौग़ात होगी

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मिली सौ सौग़ातें ज़िंदगी में
मुझे बस एक तू ही रास आई

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याद हम को आज भी सौग़ात है
जो हमारी आख़िरी ही बात है

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लड़की मुझ पर कुछ सौग़ातें कर
कुछ पल तो मुझ सेे भी बातें कर

मैं दिन मेरा तेरा करता हूँ
तू भी मेरी अपनी रातें कर

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मुझे आज भी याद है बात तेरी
मिली थी मुझे यार सौगात तेरी

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प्रेम के सौग़ात थे उस
में
तुम ने केवल क़ाफ़िया देखा

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ख़ुशियों से भी मेरा पाला पड़ रक्खा
ग़म की हर सौग़ात समझ में आती है

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सौ मिलीं ज़िंदगी से सौग़ातें
हम को आवारगी ही रास आई

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सोग़ गहरे दुःख का भार लिए होता है, अक्सर किसी प्रियजन की हानि से जुड़ा होता है। कविता में, यह केवल उदासी से परे जाता है, एक गहन विलाप का रूप लेता है जो आत्मा में गूंजता है, मानव अनुभव के सार्वभौमिक दुःख को छूता है।

कवि अक्सर सोग़ का उपयोग व्यक्तिगत हानि की गहराई को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एक ऐसा शब्द है जो खाली कमरों की खामोशी और अनकहे शब्दों की गूंज के साथ गूंजता है। यह खुशी के विपरीत है, खुशी की नाजुकता को उजागर करता है।

सोग़ खुशी और दुःख के बीच नाजुक संतुलन की याद दिलाता है, गहरी भावना के लिए मानव क्षमता का प्रमाण है।