Meaning of

सोज़-ए-इंतिज़ार

soz-e-intizaar • سوز انتظار

इंतज़ार की जलन; तड़प

burning of waiting; longing

انتظار کی جلن; تڑپ

Persian

यह वाक्यांश उस गहरी, जलती हुई पीड़ा को दर्शाता है जो किसी चीज़ या व्यक्ति के इंतज़ार में होती है। कविता में, यह उस तड़प को पकड़ता है जो दिल के भीतर चुपचाप लेकिन तीव्रता से जलती रहती है।

कवि अक्सर इस वाक्यांश का उपयोग अधूरी इच्छाओं की मौन पीड़ा को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह धैर्य की शांति के विपरीत, इंतज़ार की आंतरिक उथल-पुथल को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, इंतज़ार की जलन मानव स्थिति का एक गहरा प्रतीक बन जाती है।