Meaning of

सोज़-ए-पैहम

soz-e-paiham • سوز پیہم

लगातार जलन; निरंतर पीड़ा

constant burning; perpetual pain

مسلسل جلنا; مسلسل درد

Persian

'सोज़-ए-पैहम' शब्द एक अंतहीन आंतरिक उथल-पुथल का सार प्रस्तुत करता है, एक आग जो कभी बुझती नहीं। कविता में, यह अक्सर आत्मा के भीतर की अनन्त संघर्ष का प्रतिनिधित्व करता है, एक ऐसी लालसा या दुःख जो बिना विराम के बना रहता है।

कवि 'सोज़-ए-पैहम' का उपयोग एक अनंत भावनात्मक संघर्ष के विचार को व्यक्त करने के लिए करते हैं। इसे अक्सर शांति के क्षणों के साथ रखा जाता है, कुछ दुखों की निरंतर प्रकृति को उजागर करते हुए।

'सोज़-ए-पैहम' की अनवरत ज्वाला में, हृदय के गहरे सत्य मिलते हैं, जो हमेशा जलते रहते हैं लेकिन कभी समाप्त नहीं होते।