Meaning of

तख़’ईल

takhayyul • تخیل

कल्पना; फैंटेसी

imagination; fancy

تخیل; تصور

Arabic

तख़य्युलात पे मबनी नहीं है रिश्ता मेरा
हक़ीक़तन मेरे दिल में मकीं है ज़ात तेरी

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ये किस ने फ़ोन पे दी साल-ए-नौ की तहनियत मुझ को
तमन्ना रक़्स करती है तख़य्युल गुनगुनाता है

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जब तलक क़ुव्वत-ए-तख़य्युल है
आप पहलू से उठ नहीं सकते

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भले ही तल्ख़ हो कितनी भी ये गुफ़्तार की रफ़्तार
मगर नफ़रत के आगे कब थमी है प्यार की रफ़्तार

तख़य्युल ने दिखाई वो अजब तेज़ी बिछड़ते वक़्त
मेरी नज़रों से कम निकली तुम्हारी कार की रफ़्तार

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तुम्हारे तख़य्युल का ही वक़्त है
तुम्हारी ही यादों की ये चाय है

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तख़य्युलात पे मबनी नहीं है रिश्ता मेरा
हक़ीक़तन मेरे दिल में मकीं है ज़ात तेरी

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ये किस ने फ़ोन पे दी साल-ए-नौ की तहनियत मुझ को
तमन्ना रक़्स करती है तख़य्युल गुनगुनाता है

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तख़’ईल, अपने सार में, कल्पना की असीमित दुनिया है। कविता में, यह वह कैनवास बन जाता है जहाँ सपने और वास्तविकता मिलते हैं, कवि को साधारण से परे जाने की अनुमति देते हैं।

कवि 'तख़’ईल' का उपयोग जीवंत चित्रण बनाने और अवचेतन की गहराइयों का पता लगाने के लिए करते हैं। यह ठोस और अलौकिक के बीच एक पुल के रूप में कार्य करता है।

तख़’ईल कवि की अनंत में उड़ान है, जहाँ सीमाएँ घुल जाती हैं और रचनात्मकता सर्वोच्च होती है।