Meaning of

तमग़ा-ए-उलफ़त

tamgha-e-ulfat • سنائیں

प्रेम का तमग़ा; स्नेह का प्रतीक

medal of love; emblem of affection

محبت کا تمغہ; الفت کی علامت

Persian

शे'र वो हम नहीं सुनाएँगे
ऐब सारे नज़र आ जाएँगे

खींच लेते हैं, हाथ मौक़े' पर
हाथ उन से नहीं मिलाएँगे

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गीत लिक्खे भी तो ऐसे के सुनाएँ न गए
ज़ख़्म यूँँ लफ़्ज़ों में उतरे के दिखाएँ न ग‌ए

आज तक रक्खे हैं पछतावे की अलमारी में
एक दो वादे जो दोनों से निभाएँ न गए

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रोज़ रोएँगे दिल जलाएँगे
एक दिन थक के बैठ जाएँगे

कौन हम को गले लगाता है
हम किसे दास्ताँ सुनाएँगे

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अब जो कोई पूछे भी तो उस से क्या शरह-ए-हालात करें
दिल ठहरे तो दर्द सुनाएँ दर्द थमें तो बात करें

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न हों अश'आर में माअनी न सही
ख़ुद कलामी का ज़रिया ही सही

तुम न नवाज़ो शे'र को, न सुनाएंगे
ये मेरा ज़ाती नज़रिया ही सही

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हाल-ए-दिल तुम को हम सुनाएँगे
अपना ग़म भी तुम्हें दिखाएँगे

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इक सिलसिला तवील रहा इंतिज़ार का
अब हाल क्या सुनाएँ दिल-ए- बेक़रार का

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सुनाएँ क्या हम ये जानते हैं कि जी का बाक़ी सुकूँ लुटेगा
हमारे नग़्मों पे रो पड़ेगा तुम्हारा हँसता गुलाब चेहरा

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जब तेरे बच्चे मेरी नज़्म सुनाएंगे तुझ को
तब तू समझेगी तू ने क्या खोया था ऐ लड़की

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किसे जा कर सुनाएँ क़िस्से अब अपनी मुहब्बत के
यहाँ हर आदमी खोया हुआ है अपनी ही धुन में

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शे'र वो हम नहीं सुनाएँगे
ऐब सारे नज़र आ जाएँगे

खींच लेते हैं, हाथ मौक़े' पर
हाथ उन से नहीं मिलाएँगे

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गीत लिक्खे भी तो ऐसे के सुनाएँ न गए
ज़ख़्म यूँँ लफ़्ज़ों में उतरे के दिखाएँ न ग‌ए

आज तक रक्खे हैं पछतावे की अलमारी में
एक दो वादे जो दोनों से निभाएँ न गए

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मूल रूप में, 'तमग़ा-ए-उलफ़त' प्रेम या स्नेह की प्रतीकात्मक मान्यता को दर्शाता है, जैसे वीरता के लिए दिया गया तमग़ा। कविता में, यह अवधारणा प्रेम द्वारा प्रदान किए गए अमूर्त सम्मान को दर्शाती है, जो अक्सर अदृश्य होते हुए भी गहराई से महसूस किए जाते हैं।

'तमग़ा-ए-उलफ़त' का प्रयोग कवि अक्सर प्रेम की मौन लेकिन गहरी मान्यताओं को व्यक्त करने के लिए करते हैं। इसे दुनिया के दृश्य पुरस्कारों के विपरीत, स्नेह के अदृश्य, दिल से महसूस किए गए सम्मानों के रूप में उपयोग किया जाता है।

कविता के क्षेत्र में, 'तमग़ा-ए-उलफ़त' प्रेम के मौन लेकिन गहरे पुरस्कारों की याद दिलाता है, जो दुनिया से अदृश्य होते हैं लेकिन दिल से संजोए जाते हैं।