Meaning of

तक़रीर

taqreer • تقریر

भाषण; संबोधन

speech; address

تقریر; خطاب

Arabic

उसे पाने का आसरा तक नहीं
सो खोने की तदबीर है मेरे पास

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तुम सितारों के भरोसे पे न बैठे रहना
अपनी तदबीर से तक़दीर बनाते जाओ

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तदबीर के दस्त-ए-रंगीं से तक़दीर दरख़्शाँ होती है
क़ुदरत भी मदद फ़रमाती है जब कोशिश-ए-इंसाँ होती है

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कोट और पतलून जब पहना तो मिस्टर बन गया
जब कोई तक़रीर की जलसे में लीडर बन गया

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बिजली इक कौंध गई आँखों के आगे तो क्या
बात करते कि मैं लब तश्न-ए-तक़रीर भी था

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कुछ इस के सँवर जाने की तदबीर नहीं है
दुनिया है तिरी ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर नहीं है

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अब छोड़ कर तन्हा मुझे मसरूफ़ है वो भी कहीं
उस के लिए भी मैं फ़क़त तदबीर था तन्हाई का

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चाह रखता है मिरे से वो अगर तक़रीर की
बात देरीना मोहब्बत की उठाया नईं करे

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अदू होते रहे अहबाब कैसी ये करिश्माई,
इसी तदबीर में मैं रोज़ सुब्ह-ओ-शाम रहता था।

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सनद रहे सब को जल्लादों ने तक़रीरें कर दी हैं
काफ़िर का जो सर काटेगा वो मोमिन कहलाएगा

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उसे पाने का आसरा तक नहीं
सो खोने की तदबीर है मेरे पास

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तुम सितारों के भरोसे पे न बैठे रहना
अपनी तदबीर से तक़दीर बनाते जाओ

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‘तक़रीर’ बोले गए शब्दों का भार वहन करता है, जो अक्सर औपचारिक और संरचित होते हैं। कविता में, यह अभिव्यक्ति की शक्ति, विचारों को वाक्पटुता के साथ व्यक्त करने की कला का प्रतीक हो सकता है।

कवि 'तक़रीर' का उपयोग प्रेरणा, शब्दों के प्रभाव, या स्पष्ट भाषण की सुंदरता के विषयों को खोजने के लिए कर सकते हैं। इसे मौन या अनकहे विचारों के विपरीत रखा जा सकता है।

‘तक़रीर’ की गूंज में, शब्द अपनी स्थायी प्रतिध्वनि पाते हैं।