Meaning of

तवक़्क़ो

tavakko • توقع

उम्मीद; आशा

expectation; hope

امید; آس

Arabic

चलो इक बात से बेबार की मुझ को तसल्ली है
तवक़्क़ो ख़ुद किसी से वो कभी दिल में नहीं रखता

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इतनी तवक़्क़ुआत ज़माने को हम सेे है
उतनी तो उम्र भी नहीं लाए लिखा के हम

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बस यूँँ ही दिल को तवक़्क़ो' सी है तुझ से वर्ना
जानता हूँ कि मुक़द्दर है मेरा तन्हाई

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रौशनी घर की ज़रूरी है मगर
दिल को भी थोड़ी तवक़्क़ो चाहिए

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ये सच है उस सेे मिलने की तवक्को फिर नहीं करते
मगर पहली मोहब्बत को भुलाया भी नहीं जाता

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गिला क्यूँँ हो अगर पूछा न मेरा हाल तक उस ने
तवक़्क़ो' ये ही थी मेरी तग़ाफ़ुल-आश्ना से जब

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उस की मर्ज़ी जिसे तवक़्क़ो दे
ये तो बस एक है समाँ मेरा

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ज़िन्दगी में कभी नहीं करना
ये मोहब्बत अभी नहीं करना

अब तुझे छू सकें नहीं मुमकिन
तुम तवक़्क़ो अभी नहीं करना

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ख़बर तेरी ज़रा सी चाहिए बस
मुझे क्या चाँद तारे कहकशाँ से

सिवा आँसू के कुछ मिलना नहीं है
तवक़्क़ो कुछ न रख मुझ रायगाँ से

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नित वफ़ा की तवक़्क़ु'आत न रख
इश्क़ में ये हराम है 'साहिल'

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चलो इक बात से बेबार की मुझ को तसल्ली है
तवक़्क़ो ख़ुद किसी से वो कभी दिल में नहीं रखता

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इतनी तवक़्क़ुआत ज़माने को हम सेे है
उतनी तो उम्र भी नहीं लाए लिखा के हम

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अपने मूल अर्थ में, 'तवक़्क़ो' आशा के साथ प्रतीक्षा की स्थिति को दर्शाता है, आने वाले समय की एक कोमल प्रत्याशा। कविता ने इस शब्द को अपनाया है ताकि इच्छा और धैर्य के बीच के नाजुक संतुलन को व्यक्त किया जा सके, जहाँ दिल मौन लालसा में प्रतीक्षा करता है।

'तवक़्क़ो' का उपयोग कवि अक्सर लालसा और धैर्य के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह प्रिय, एक सपना, या पूर्णता के क्षण की प्रतीक्षा के सार को पकड़ता है। यह शब्द निराशा के विपरीत है, एक आशावादी सहनशीलता को उजागर करता है।

तवक़्क़ो प्रतीक्षा की सुंदरता की एक कोमल याद दिलाता है। यह दिल की मौन शक्ति को संबोधित करता है।