Meaning of

वालिदैन

waalidain • بھوک

माता-पिता; जनक

parents; progenitors

والدین; ماں باپ

Arabic

भूख है तो सब्र कर, रोटी नहीं तो क्या हुआ
आजकल दिल्ली में है ज़ेर-ए-बहस ये मुद्दआ'

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अपने में'यार से नीचे तो मैं आने से रहा
शे'र भूखा हूँ मगर घास तो खाने से रहा

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किसी भूके से मत पूछो मोहब्बत किस को कहते हैं
कि तुम आँचल बिछाओगे वो दस्तर-ख़्वान समझेगा

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मुफ़्लिसी है भूख है मैं खा न जाऊँ यार को
प्यार की बातें अभी मेरे लिए बकवास हैं

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भूके बच्चों की तसल्ली के लिए
माँ ने फिर पानी पकाया देर तक

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बेनतीजा रह गईं दिल्ली में सारी बैठकें
अन्नदाता खेत की मेड़ों पे भूखे मर गए

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तेरी आवाज़ मेरा रिज़्क हुआ करती थी
तू मुझे भूख से मारेगा ये सोचा नहीं था

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ग़ज़लें लिखकर सब सेे पहले उस को भेजा करता हूँ
जैसे खाना बन जाने पर भोग लगाया जाता है

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तलाश हम को किसी भी बदन की है ही नहीं
हवस की भूख हमारे ज़ेहन की है ही नहीं

किसी से बिछड़े तो कोई फ़ना नहीं होता
क़ज़ा की बात तो अब के ज़मन की है ही नहीं

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पहले तो मुझ को भी हफ़्तों तक तड़पाया जाता है
तब जा कर के फिर मेरा ये फ़ोन उठाया जाता है

ग़ज़लें लिखकर सब सेे पहले उस को भेजा करता हूँ
जैसे खाना बन जाने पर भोग लगाया जाता है

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भूख है तो सब्र कर, रोटी नहीं तो क्या हुआ
आजकल दिल्ली में है ज़ेर-ए-बहस ये मुद्दआ'

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अपने में'यार से नीचे तो मैं आने से रहा
शे'र भूखा हूँ मगर घास तो खाने से रहा

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'वालिदैन' शब्द जीवन के आधारभूत व्यक्तियों की छवि प्रस्तुत करता है, जो पोषणकर्ता और रक्षक होते हैं। कविता में, यह प्रायः कृतज्ञता, श्रद्धा और कभी-कभी वियोग या हानि के दर्द का भार वहन करता है।

'वालिदैन' का उपयोग कवि अक्सर पारिवारिक बंधनों से जुड़ी गहरी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह माँ की गोद की गर्माहट या पिता के मार्गदर्शक हाथ को दर्शा सकता है। यह शब्द विरासत और धरोहर के विषयों को भी उजागर कर सकता है।

कविता में, 'वालिदैन' प्रेम और स्मृति का पात्र बन जाता है, अतीत से वर्तमान तक का पुल और भविष्य के लिए मार्गदर्शक।