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✦ WRITER
Krishan Kant Saini
GHAZAL
रोग ऐसे भी ग़म-ए-यार से लग जाते हैं
दर से उठते हैं तो दीवार से लग जाते हैं
Ahmad Faraz
✦ WRITER
Raunak Karn
GHAZAL
मोहब्बत से मुकर जाना ज़रूरी हो गया था
पलट के अपने घर जाना ज़रूरी हो गया था
Rehana Qamar
GHAZAL
दास्तानों में मिले थे दास्ताँ रह जाएँगे
उम्र बूढ़ी हो तो हो हम नौजवाँ रह जाएँगे
Fazil Jamili
POST
GHAZAL
या रब मुआ'फ़ कर के न दे कर्ब-ए-इंफ़ि'आल
मैं ने ख़ताएँ की हैं सज़ा चाहिए मुझे
Khumar Barabankvi
GHAZAL
फिर कभी लौट कर न आएँगे
हम तिरा शहर छोड़ जाएँगे
Habib Jalib
SHER
रूह तन्हा थी मगर ये जिस्म रुकता तो कहाँ
ज़िंदगी जी भी नहीं और उम्र ढलती ही गई
arjun chamoli
GHAZAL
ये मेरी नहीं मेरे दिल की ख़ता है
ये हर शख़्स को एक सा मानता है
SAAGAR SINGH RAJPUT
♫ AUDIO
Ankit Maurya
(Shayar)
NAZM
नुक़ूश-ए-हसरत मिटा के उठना, ख़ुशी का परचम उड़ा के उठना
— Kaifi Azmi
SHER
उस की हर इक याद में लज़्ज़त होती है
पहली मोहब्बत पहली मोहब्बत होती है
Aadil Rasheed
NAZM
"बस यूँँही जीते रहो"
— Nida Fazli
GHAZAL
आज तो रोने को जी हो जैसे
फिर कोई आस बँधी हो जैसे
Rajinder Manchanda Bani
GHAZAL
ज़ंजीर कट के क्या गिरी आधे सफ़र के बीच
मैं सर पकड़ के बैठ गया रहगुज़र के बीच
Shahid Zaki
GHAZAL
बस ख़तरों की ख़ातिर जाने जाते हैं
जिन रस्तों से हम दीवाने जाते हैं
Ahmad Azeem
GHAZAL
फूल ने टहनी से उड़ने की कोशिश की
इक ताइर का दिल रखने की कोशिश की
Gulzar
GHAZAL
वो अपने घर चला गया अफ़सोस मत करो
इतना ही उस का साथ था अफ़सोस मत करो
Bashir Badr
NAZM
"हम मिलेंगे कहीं"
— Tehzeeb Hafi