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Nazm
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GHAZAL
यूँँ लग रहा है जैसे कोई आस-पास है
वो कौन है जो है भी नहीं और उदास है
Nida Fazli
SHER
अब तो उस सूने माथे पर कोरेपन की चादर है
अम्मा जी की सारी सजधज, सब ज़ेवर थे बाबूजी
Aalok Shrivastav
✦ WRITER
Qamar Jalalvi
NAZM
''चल आ एक ऐसी नज़्म कहूँ''
— Amir Ameer
SHER
ये फ़िल्मों में ही सब को प्यार मिल जाता है आख़िर में
मगर सचमुच में इस दुनिया में ऐसा कुछ नहीं होता
Tehzeeb Hafi
SHER
मंदिर में शिवलिंग के पास रखे हों तो
हम जैसे पत्थर भी पूजे जाते हैं
Kumar Kaushal
SHER
रोज़ ताज़ा मिलेगा ज़ख़्म तुम्हें
इश्क़ का रोग पाल कर देखो
Nasir Hayaat
✦ WRITER
Ambar
SHER
तुझ से शब भर कलाम करने को
एक तस्वीर तेरी काफ़ी है
Dharmesh Solanki
♫ AUDIO
मल्लाहों का ध्यान बटाकर दरिया चोरी कर लेना है,
Tehzeeb Hafi (Shayar)
GHAZAL
नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है
कुछ दिन शहर में घू
Nida Fazli
GHAZAL
रात गुज़रे है मुझे नज़्अ' में रोते रोते
आँखें फिर जाएँगी अब सुब्ह के होते होते
Meer Taqi Meer
GHAZAL
बरसों के बा'द देखा इक शख़्स दिलरुबा सा
अब ज़ेहन में नहीं है पर नाम था भला सा
Ahmad Faraz
GHAZAL
पाए ख़िताब क्या क्या देखे इ'ताब क्या क्या
दिल को लगा के हम ने खींचे अज़ाब क्या क्या
Meer Taqi Meer
GHAZAL
हुकूमत देख कर ज़ुल्म-ओ-सितम चुप-चाप सोती है
हवा भी ख़ौफ़ के साये में याँ बेज़ार होती है
REHAN KHAN
GHAZAL
किसे मनाते मियाँ हम किसे ख़फ़ा करते
कि कट रही है हमारी ख़ुदा-ख़ुदा करते
Kumar Kaushal
SHER
ग़ज़ल मैं मोहब्बत पे कह दूँ अभी
मगर ये समय की ज़रूरत नहीं
Rahul
GHAZAL
ख़ला की ओढ़ कर चादर अदम का गीत गाता हूँ
सुना कर अपनी ख़ामोशी मैं ख़ुद में डूब जाता हूँ
REHAN KHAN
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