"शायद"
शायद किसी दौर में किसी युग में
हमने एक दूसरे से वा'दा किया होगा कि
अभी नहीं तो कभी और
हम एक दूसरे से मिलेंगे तो ज़रूर
हमने एक दूसरे का कितना इंतिज़ार किया होगा
तब से लेकर अब तक
कितने और लोगों में हमने एक दूसरे को ढूँढा होगा
या शायद अब मिले भी हैं तो नहीं याद होगा वो कुछ भी
जो कभी रहा होगा हमारे दरमियाँ
या कभी कुछ रहा ही नहीं होगा ये मेरी मात्र कल्पना होगी
पर तुम्हें देख कर तो यही लगता है मुझे कि
शायद किसी दौर में किसी युग में
हमने एक दूसरे से वा'दा किया होगा कि
अभी नहीं तो कभी और
हम एक दूसरे से मिलेंगे तो ज़रूर
तुम बहुत रूठती होगी उस वक़्त मुझ सेे
क्यूँँकि मैं भूल जाता हूँ छोटी छोटी बातें
जैसे की तुम्हारी आँखों में खोकर
मुझे याद नहीं रहा होगा की तुमने कैसे कपड़े पहने थे
वक़्त का ध्यान न रहता होगा मुझे
तुम याद दिलाती मुझे कि
अब देर हो गई है बहुत, जाना पड़ेगा
कभी कभी तुम सेे मिलने के उत्साह में मैंने कई बार
देरी भी की होगी और तुमने मूँह फूला कर
मुझ सेे नाराज़गी भी जताई होगी कि
तुम हमेशा देर कर देते हो
शायद उस वक़्त की तरह मैंने आने में अब भी देर कर दी
पर मुझे तुम्हें मनाना आता था और तुम मान जाती थी
अब वो मनाने के तरीक़े मुझे न जाने क्यूँ याद नहीं आ रहे
या फिर ये सब मेरी मात्र कल्पना ही है
पर तुम्हें देख कर तो यही लगता है मुझे कि
शायद किसी दौर में किसी युग में
हमने एक दूसरे से वा'दा किया होगा कि
अभी नहीं तो कभी और
हम एक दूसरे से मिलेंगे तो ज़रूर
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