"मेरा प्रेम"
मुझे कुछ ऐसा प्रेम चाहिए
मेरी बातों को समझ सके,वैसा प्रेम चाहिए,
मुझे नहीं चाहिए उससे सात जन्मों का साथ,
मेरे इस जन्म को मुकम्मल कर सके,
मुझे कुछ ऐसा प्रेम चाहिए
मेरी व्यथा को अपना समझे,मेरी प्रसन्नता को अपना समझे,
मेरे हृदय की गहराई में उतरकर उसको टटोले,
उस
में छुपी भावनाओं को बाहर निकाले,
मुझे कुछ ऐसा प्रेम चाहिए
मेरी भूलों पर सबके सामने पर्दा डाले,
सबसे बचाकर मुझे,अपने गले से लगाए,
मेरी ग़लतियों पर मुझे डाँटे,उन्हें सुधारे,
मुझे ग़लतियों से सीखने वाला एक इंसान बना सके,
मुझे कुछ ऐसा प्रेम चाहिए
समाज में ग़लत का विरोध करे,सत्य का साथ कभी न छोड़े,
अपनी ग़लती होने पर बिन कहे माफ़ी मांगे,
परंतु गलत न होने पर पूरे समाज से लड़ जाए
मेरे हृदय को प्रेम से भर सके,
मुझे एक अच्छा इंसान बना सके
मुझे कुछ ऐसा प्रेम चाहिए
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