Ahmad Armani

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@ahmad-armani

Ahmad Armani shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ahmad Armani's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
जोश-ए-वहशत में गरेबाँ पे नज़र है शायद
यही दीवाने का सामान-ए-सफ़र है शायद

मैं तो सिर्फ़ आप की बदनामी का करता हूँ ख़याल
आप को भी मिरी रुस्वाई का डर है शायद

उन के दामन पे जो टपका था ख़ुशी का आँसू
मैं तो समझा था दरख़्शंदा गुहर है शायद

रौंदा जाता है जो पैरों से अबस मक़्तल में
ये किसी आशिक़-ए-नाकाम का सर है शायद

बे-पिए होश-फ़रामोश हैं सारे मय-कश
उन की मख़मूर निगाहों का असर है शायद

ज़ुल्फ़-ओ-रुख़ देख के 'अहमद' ये गुमाँ होता है
शाम की गोद में बेताब सहर है शायद
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Ahmad Armani
हस्ती में उस का जल्वा अयाँ पा रहा हूँ आज
दिल को तसव्वुरात से बहला रहा हूँ आज

मिल जाए कोई बाब ख़ुशी का मैं इस लिए
फिर से किताब-ए-ज़ीस्त को दोहरा रहा हूँ आज

अब अपना ज़र्फ़-ए-मय-कशी दिखलाने के लिए
साक़ी के हाथों ख़ूब पिए जा रहा हूँ आज

महफ़िल में ख़ास उन की अक़ीदत के वास्ते
हाथों पे अपने दिल को लिए जा रहा हूँ आज

मंज़िल पे मैं हूँ या कि फ़रेब-ए-नज़र है ये
हर सम्त मैं ही ख़ुद को नज़र आ रहा हूँ आज

उन के मरीज़-ए-हिज्र ने ये कह के जान दी
कल आएँगे वो देखने मैं जा रहा हूँ आज

'अहमद' ज़माना दीद का है जिस की मुंतज़िर
हर-सू मैं उस का जल्वा अयाँ पा रहा हूँ आज
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Ahmad Armani
क्या हुआ कब कहाँ नहीं मालूम
कितने उजड़े मकाँ नहीं मालूम

मुझ से गुलशन में बाग़बाँ इतना
क्यूँ हुआ बद-गुमाँ नहीं मालूम

दिल भी ग़ाएब है आज पहलू से
जाने होगा कहाँ नहीं मालूम

वो सितम-गर भी हाल पर मेरे
कब हुआ मेहरबाँ नहीं मालूम

मुझ को जोश-ए-जुनूँ ने ए 'अहमद'
ला के छोड़ा कहाँ नहीं मालूम
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Ahmad Armani