Akhtar Feroz shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Akhtar Feroz's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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Ghazal
नफ़रतों से चेहरा चेहरा गर्द था मुजरिम-ए-इंसानियत हर फ़र्द था
कुछ हवाओं में भी था ख़ौफ़-ओ-हिरास कुछ फ़ज़ाओं का भी चेहरा ज़र्द था
बे-हिसी में दफ़्न थी इंसानियत आदमिय्यत का भी लहजा सर्द था
अपने काँधों पर उठाए अपना बोझ कोई आवारा कोई शब-गर्द था
फूल से चेहरे थे मुरझाए हुए शहर-ए-गुल भी आज शहर-ए-दर्द था
जिस ने दुनिया भर के ग़म अपनाए थे उस को दुनिया ने कहा बे-दर्द था
सच तो 'अख़्तर' ये है उस माहौल में मेरा दुश्मन ही मिरा हमदर्द था