Ambuj Shrivastava

Ambuj Shrivastava

@ambuj-shrivastava

Ambuj Shrivastava shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ambuj Shrivastava's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
इश्क़ पर दोस्ती का चेहरा है
घाव देखो ये कितना गहरा है

सुन के सब की जो पहुँचा मंज़िल पे
शख़्स वो असलियत में बहरा है

दश्त में सिर्फ़ प्यास पलती है
दश्त दिखने में बस सुनहरा है

जिस को तुम ने कहा था आओगी
फूल पकड़े वो अब भी ठहरा है
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Ambuj Shrivastava
ख़ुदा को आज़माना चाहता हूँ
मैं ये दुनिया जलाना चाहता हूँ

किसी शाइ'र से उस की ज़िंदगी के
मैं सारे ग़म चुराना चाहता हूँ

मैं रूह-ए-'जौन' को जन्नत में जा कर
गले कस कर लगाना चाहता हूँ

तिरी छत पर टँगे सब पैरहन से
तिरी ख़ुशबू चुराना चाहता हूँ

फ़क़त मदहोश हो कर क्या मज़ा है
मैं पी कर लड़खड़ाना चाहता हूँ

घड़ी के काँटों को उल्टा घुमा कर
समय को मैं बचाना चाहता हूँ

शजर को काट कर मैं ख़ूब रोया
मैं अपना घर बनाना चाहता हूँ

नए हाथों में मैं पुस्तक थमा कर
सभी सरहद मिटाना चाहता हूँ

उसे कह कर की अब भी है मोहब्बत
मैं उस का दिल दुखाना चाहता हूँ

किसी मा'सूम बच्चे की तरह मैं
ख़ुदा को सब बताना चाहता हूँ
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Ambuj Shrivastava
आँख मेरी रो रही है
आज दुल्हन वो बनी है

ज़िंदगी पर मैं हँसा था
मौत मुझ पर हँस रही है

उस ने कुछ ऐसे पुकारा
हर तरफ़ अब बे-ख़ुदी है

जीतते ही जा रहे हो
इश्क़ है बाज़ी नहीं है

एक तेरी याद है अब
एक मेरी शाइरी है

दर्द ऐ तहरीर देखो
ऊला सानी नहीं है
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Ambuj Shrivastava
उस के कंगन से मोहब्बत की खनक आती है
ज़र्द-रू रातों में चंदन की महक आती है

भीड़ में गुम हुए बच्चे की तरह मेरा दिल
देख लूँ माँ को तो आँखों में चमक आती है

गाँव का घर घर के आँगन में खिली वो तुलसी
घर से अब पाँव बढ़ाता हूँ सड़क आती है

ज़िक्र होता है तिरा जब भी किसी महफ़िल में
मौत क़दमों से ये सीने पे सरक आती है

दफ़्न हैं कितने मोहब्बत के फ़साने उस पर
गाँव से लड़ के शहर को जो सड़क आती है
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