Badnam Nazar

Badnam Nazar

@badnam-nazar

Badnam Nazar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Badnam Nazar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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हयात ढूँढ रहा हूँ क़ज़ा की राहों में
पनाह माँगने आया हूँ बे-पनाहों में

बदन ममी था नज़र बर्फ़ साँस काफ़ूरी
तमाम रात गुज़ारी है सर्द बाँहों में

अब उन में शोले जहन्नम के रक़्स करते हैं
बसे थे कितने ही फ़िरदौस जिन निगाहों में

बुझी जो रात तो अपनी गली की याद आई
उलझ गया था मैं रंगीन शाह-राहों में

न जाने क्या हुआ अपना भी अब नहीं है वो
जो एक उम्र था दुनिया के ख़ैर-ख़्वाहों में

मिरी तलाश को जिस इल्म से क़रार आए
न ख़ानक़ाहों में पाई न दर्स-गाहों में
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Badnam Nazar
दिल-ओ-जाँ के फ़साने क्या हुए सब
मोहब्बत के तराने क्या हुए सब

यहाँ कुछ सूफ़ियों का घर था पहले
वो उन के आस्ताने क्या हुए सब

पुराना पेड़ बरगद का कहाँ है
परिंदों के ठिकाने क्या हुए सब

कहाँ हैं शहर के बे-फ़िक्र बच्चे
मसर्रत के ख़ज़ाने क्या हुए सब

बरसती थी मोहब्बत आसमाँ से
वो बारिश के ज़माने क्या हुए सब

तिरे अशआ'र पर ये चुप सी क्यूँ है
'नज़र' तेरे दिवाने क्या हुए सब
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Badnam Nazar
दीवार-ओ-दर का नाम था कोई मकाँ न था
मैं जिस ज़मीन पर था वहाँ आसमाँ न था

मैं दुश्मनों की तरह रहा ख़ुद से दूर क्यूँ
अपने सिवा तो कोई मिरे दरमियाँ न था

क़दमों में तपती रेत थी चारों तरफ़ थी आग
और ज़िंदगी के सर पर कोई साएबाँ न था

ढूँडी थी माँ की गोद में जा-ए-अमाँ मगर
बेचैनियों को मेरी वहाँ भी अमाँ न था

मेरे सफ़र में भीड़ जो थी हम-क़दम मिरी
यादों की थी बरात कोई कारवाँ न था

अपने हिसार-ए-जिस्म में कब रह सका 'नज़र'
देखा गया था उस को जहाँ वो वहाँ न था
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Badnam Nazar
बाग़-ए-दिल में कोई ग़ुंचा न खिला तेरे बा'द
भूल कर आई न इस सम्त सबा तेरे बा'द

तेरी ज़ुल्फ़ों की महक तेरे बदन की ख़ुशबू
ढूँढती फिरती है इक पगली हवा तेरे बा'द

वही मेले वही पनघट वही झूले वही गीत
गाँव में पर कोई तुझ सा न मिला तेरे बा'द

अंधी रातों की स्याही मिरा मक़्दूर हुई
कोई तारा मिरे आँगन न गिरा तेरे बा'द

दे दिया अपने दिल-ओ-जान का इक इक क़तरा
और क्या चाहती है तेरी सदा तेरे बा'द

जिस्म मेरा था मगर रूह का मालिक था और
कैसी अय्यारी का ये राज़ खुला तेरे बा'द

हद-ए-इमकान तलक किरनें वफ़ा की बिखरें
जिस्म मेरा कई ज़ख़्मों से सजा तेरे बा'द

तू ही ग़ालिब नहीं इक जौर-ए-फ़लक का मारा
मेरे घर आया है तूफ़ान-ए-बला तेरे बा'द

किसी ख़ुश-फ़हमी में रहता है तू बदनाम-'नज़र'
कौन रक्खेगा तुझे याद भला तेरे बा'द
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Badnam Nazar
गुम-शुदा मौसम का आँखों में कोई सपना सा था
बादलों के उड़ते टुकड़ों में तिरा चेहरा सा था

फिर कभी मिल जाए शायद ज़िंदगी की भीड़ में
जिस की बातें प्यारी थीं और नाम कुछ अच्छा सा था

जाँ-ब-लब होने लगा है प्यास की शिद्दत से वो
ख़ुश्क रेगिस्तान में इक शख़्स जो दरिया सा था

घिर गया है अब तो शो'लों में मिरा सारा वजूद
उस की यादें थीं तो सर पर इक ख़ुनुक साया सा था

उस ने अच्छा ही किया रिश्तों के धागे तोड़ कर
मैं भी कुछ उकता गया था वो भी कुछ ऊबा सा था

शहर की एक एक शय अपनी जगह पर है 'नज़र'
क्या हुआ वो आदमी कुछ कुछ जो दीवाना सा था
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Badnam Nazar
टपकते शो'लों की बरसात में नहाउँगा
अब आ गया हूँ तो इस शहर से न जाऊँगा

कशिश है घर में न बाहर की रौनक़ें बाक़ी
यूँही रहा तो कहाँ जा के मुस्कराउँगा

ये गीली गीली सी ख़ुशबू ये नर्म नर्म निगाह
तुम्हारे पास रहा मैं तो भीग जाऊँगा

बसा सको तो बसा लो मुझे ख़यालों में
कि इस दयार में दोबारा मैं न आऊँगा

क़दम समेट के चलना भी सीख जाओगे
तुम्हें मैं गाँव की पगडंडियाँ दिखाऊँगा

चला था ढूँडने मैं ज़िंदगी की बुनियादें
पता न था कि ख़ुद अपना पता न पाऊँगा

न हूँगा मैं तो मिरी दास्तान होगी 'नज़र'
ज़मीं पे धूप की सूरत मैं फैल जाऊँगा
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Badnam Nazar
ज़हर पिए मदहोश अँधेरी रात
नागिन सी ख़ामोश अँधेरी रात

दिन की सूरत मुझ को भी खा जा आ कर
मैं भी हूँ बेहोश अँधेरी रात

शहरों में ख़ामोशी ही ख़ामोशी थी
तूफ़ाँ था पुर-जोश अँधेरी रात

क्या जाने किस ने ओढ़ा मेरा पैकर
मैं ख़्वाब-ए-ख़रगोश अँधेरी रात

चाँदी जैसी किरनें मुझ पर मत डालो
मेरा तो सर-पोश अँधेरी रात

नींद कहाँ मेरे घर आएगी 'बदनाम'
मैं ख़ाना-बर-दोश अँधेरी रात
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Badnam Nazar
जो झुक के मिलते थे जलसों में मेहरबाँ की तरह
हुए हैं सर पे मुसल्लत वो आसमाँ की तरह

मुझे जो खोलो तो साहिल क़रीब कर दूँगा
समुंदरों में मैं रहता हूँ बादबाँ की तरह

तुम्हारे शहर के जबरी निज़ाम में कुछ लोग
कभी हँसे भी तो आवाज़ थी फ़ुग़ाँ की तरह

है तेज़ धूप सफ़र लम्बा पर तुम्हारी याद
है एक साया मिरे सर पे साएबाँ की तरह

न कोई पत्ता हरा है न कोई फूल खिला
बहार भी मिरे घर आई है ख़िज़ाँ की तरह

न साफ़ ज़ेहन न चेहरे के ख़ाल-ओ-ख़त रौशन
फ़ज़ाओं में है हर इक शय धुआँ धुआँ की तरह

जहाँ भी जाऊँ मैं वो दश्त हो कि दरिया हो
दुआएँ माँ की चलें साथ पासबाँ की तरह

'नज़र' के नाम का इक शख़्स कुछ जुनूनी सा
अकेला दश्त में चलता है कारवाँ की तरह
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Badnam Nazar