Balbir Rathi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Balbir Rathi's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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Shayari
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Ghazal
ख़ोल सा ओढ़े हुए लगते हैं लोग बात क्या है इतने चुप कैसे हैं लोग
बंद कमरों से अभी निकले हैं लोग और ही अंदाज़ से मिलते हैं लोग
जिस को देखो है वही झुलसा हुआ किस दहकती आग से निकले हैं लोग
कौन किसी की फ़िक्र करता है यहाँ अपने अपने जाल में उलझे हैं लोग
रौशनी की क्यूँ नहीं करते तलाश क्यूँ अँधेरा बाँटते फिरते हैं लोग
मंज़िलों का ज़िक्र ही बे-सूद है गुमरही से मुतमइन लगते हैं लोग
ज़हर पीते हैं मगर मरते नहीं कुछ न पूछो कैसे क्या करते हैं लोग