अपनी हक़ीक़त से समझौता करना सीख लिया
जीने की उम्मीद में पल पल मरना सीख लिया
बेज़ारी मायूसी जिन राहों पे मिलती हों
उन राहों से हमने आज गुज़रना सीख लिया
ज़िल्लत के एहसास ने रह रह के थुकवाया ख़ून
हमने ज़ख़्मों को इस तरह कतरना सीख लिया
जलने लगी है छानंव भी अब तो इन दीवारों की
हमने भी नफ़रत की ज़द में ठहरना सीख लिया
ग़ैरों की मानिंद हुए अपना कहने वाले
हमने घर अनजानेपन से भरना सीख लिया
ज़हर की शीशी उस दिन ख़ुद ही गिर कर टूट गई
जिस दिन जानाँ ने जीते जी मरना सीख लिया
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