Dr. Chandrashekhar Pandey Shams

Dr. Chandrashekhar Pandey Shams

@dr-chandrashekhar-pandey-shams

Dr. Chandrashekhar Pandey Shams shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Dr. Chandrashekhar Pandey Shams's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
शिगाफ़-ए-ख़ाना-ए-दिल से ही रौशनी आई
उसे तो आना था हर हाल में चली आई

कहीं ख़ुदा न बने मुझ से ख़ौफ़-ए-हिज्र-ए-अज़ीज़
कभी रुलाई कभी सोच के हँसी आई

उछल रही थीं बहुत मछलियाँ सी आँखों में
जो डाला जाल तो खिंचती हुई नदी आई

हवा के हाथ जले इक दिया जलाने में
वो सारी बस्ती जलाती हुई चली आई

वो अपने साथ कई साए ले के डूबेगा
यही उमीद दर-ए-‘शम्स’ से लगी आई
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Dr. Chandrashekhar Pandey Shams
मुझे यक़ीं है कोई रास्ता तो निकलेगा
अगर जो कुछ नहीं निकला ख़ुदा तो निकलेगा

मैं रेग-ज़ारों में दरिया तलाश करता हूँ
मिरी तलाश से इक सिलसिला तो निकलेगा

किताब-ए-ज़ीस्त के पन्ने पलट रहा हूँ मैं
किसी वरक़ से कोई फ़ल्सफ़ा तो निकलेगा

दिए दिखाते रहो दिन में ऐसे सूरज को
जो उस के दिल में अंधेरा हुआ तो निकलेगा

ये सोच कर के चमन में लगा दी आग उस ने
के इस में कोई परिंदा हुआ तो निकलेगा

सदाएँ देना मिरा काम है करूँगा मैं
कोई पहाड़ मिरा हम-नवा तो निकलेगा

मैं सारे शहर को ख़्वाबीदा छोड़ कर निकला
के आँख खुलने पे इक रहनुमा तो निकलेगा

चलो भी 'शम्स' उठो जुगनूओं की महफ़िल से
तुम्हारे बाद कोई मुद्दआ तो निकलेगा
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Dr. Chandrashekhar Pandey Shams
बढ़ कर किसी से हाथ मिलाने नहीं गए
तेवर वही हैं अब भी पुराने नहीं गए

दालान अपनी छान के बैठे तमाम उम्र
चक्कर किसी महल का लगाने नहीं गए

जब भी गए तो बैठ गए पाँव के तले
ग़लती से भी बड़ों के सिरहाने नहीं गए

महफ़िल में तेरी शोर है मेरे ही नाम का
जाने के बाद भी वो फ़साने नहीं गए

अपने हुनर से 'शम्स' थे जुगनू थे जो भी थे
फोटो किसी के साथ खिंचाने नहीं गए
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Dr. Chandrashekhar Pandey Shams
अपना तुम्हें बनाना था कह कर बना लिया
तर्ज़-ए-वफ़ा का इक नया दफ़्तर बना लिया

दुनिया को ग़म का दरिया कहा अहल-ए-इल्म ने
हम ने तुम्हारी याद को गौहर बना लिया

हाथों में उस का हाथ लिया और इस तरह
ख़ुद को रह-ए-वफ़ा का सिकंदर बना लिया

मेरे लहू में लम्स तिरा दौड़ता है यूँ
सीना से दिल निकाल के सागर बना लिया

ठोकर लगा दी राह में जिस दर को आप ने
उस दर को सब ने मील का पत्थर बना लिया

अहद-ए-विसाल उन से क़यामत के रोज़ था
तो वक़्त-ए-हिज्र 'शम्स' ने महशर बना लिया
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Dr. Chandrashekhar Pandey Shams
वस्ल की आख़िरी मंज़िल है फ़ना हो जाना
तुझ से मिल कर तिरे बंदे का ख़ुदा हो जाना

शम्अ' से मिल के ज़रा देख तो परवाने का रंग
कितना मुश्किल है कोई फ़र्क़ ज़रा हो जाना

हम तो परछाई हैं बस इश्क़ की ऐ तेग़-ए-वक़्त
हम को काटे से भला इश्क़ का क्या हो जाना

ज़िंदगी को तो समझते हैं हम इक चाल तेरी
मौत है इस का जवाब उस पे फ़िदा हो जाना

मुश्तरी ज़ोहरा ज़ुहल शम्स-ओ-हिलाल-ओ-मिर्रीख़
तेरे कूचे को है यूँ राह-ए-वफ़ा हो जाना
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Dr. Chandrashekhar Pandey Shams
दार-ओ-रसन पे हर कोई मंसूर तो नहीं
झुलसे हुए पहाड़ सभी तूर तो नहीं

ईसा-नफ़स है इश्क़ अगर ये बताइए
कि है कभी सलीब से वो दूर तो नहीं

हैं राहज़न ये साँसें मिरी क्या बताऊँ मैं
फिर भी सफ़र हयात का मजबूर तो नहीं

ये रौशनी क़सीदा है तेरे ज़ुहूर का
आँखों से दिख सके वो तिरा नूर तो नहीं

पत्थर गले में बाँध के दरिया में डूब जा
ऐ 'शम्स' तेरा इश्क़ उसे मंज़ूर तो नहीं
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Dr. Chandrashekhar Pandey Shams