Ghous Mathravi

Ghous Mathravi

@ghous-mathravi

Ghous Mathravi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ghous Mathravi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
ज़मीं की हद अगर कोई नहीं है
तो फिर मेरा भी घर कोई नहीं है

क़फ़स में बंद है पर्वाज़ मेरी
उमीद-ए-बाल-ओ-पर कोई नहीं है

हुनर उन को सिखाता फिर रहा हूँ
मगर ख़ुद में हुनर कोई नहीं है

ख़बर अख़बार में आए न आए
ख़बर से बे-ख़बर कोई नहीं है

यहाँ तो बस पड़ाव है हमारा
हमारा अपना घर कोई नहीं है

ये शहर-ए-आरज़ू है 'ग़ौस' ऐसा
जहाँ हद्द-ए-नज़र कोई नहीं है
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Ghous Mathravi
क़ल्ब-ओ-नज़र के सिलसिले मेरी निगाह में रहे
मुझ से क़रीब-तर न थे जो तिरी चाह में रहे

क़हर-ए-ख़ुदा की ज़द पे क्यूँ आ न सके सियाहकार
किस की सुपुर्दगी में थे किस की पनाह में रहे

सूरत-ए-हाल देख कर सब को है फ़िक्र ये कि अब
जिस्म अमाँ में हो न हो कज तो कुलाह में रहे

दार-ओ-रसन के फ़ैसले सच के अमीन हों अगर
थोड़ी सी जुरअत-ए-सुख़न हर्फ़-ए-गवाह में रहे

कोई सबब तो था कि 'ग़ौस' फ़हम-ओ-ज़का के बावजूद
कार-ए-सवाब छोड़ कर कार-ए-गुनाह में रहे
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