Ghous Mathravi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ghous Mathravi's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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Ghazal
ज़मीं की हद अगर कोई नहीं है तो फिर मेरा भी घर कोई नहीं है
क़फ़स में बंद है पर्वाज़ मेरी उमीद-ए-बाल-ओ-पर कोई नहीं है
हुनर उन को सिखाता फिर रहा हूँ मगर ख़ुद में हुनर कोई नहीं है
ख़बर अख़बार में आए न आए ख़बर से बे-ख़बर कोई नहीं है
यहाँ तो बस पड़ाव है हमारा हमारा अपना घर कोई नहीं है
ये शहर-ए-आरज़ू है 'ग़ौस' ऐसा जहाँ हद्द-ए-नज़र कोई नहीं है