Ghulam Rabbani Taban

Ghulam Rabbani Taban

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Ghulam Rabbani Taban shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ghulam Rabbani Taban's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal

Sher

दौर-ए-तूफ़ाँ में भी जी लेते हैं जीने वाले दूर साहिल से किसी मौज-ए-गुरेज़ाँ की तरह — Ghulam Rabbani Taban
आज किसी ने बातों बातों में जब उन का नाम लिया दिल ने जैसे ठोकर खाई दर्द ने बढ़ कर थाम लिया — Ghulam Rabbani Taban
रह-ए-तलब में किसे आरज़ू-ए-मंज़िल है शुऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है — Ghulam Rabbani Taban
ये चार दिन की रिफ़ाक़त भी कम नहीं ऐ दोस्त तमाम उम्र भला कौन साथ देता है — Ghulam Rabbani Taban
यादों के साए हैं न उमीदों के हैं चराग़ हर शय ने साथ छोड़ दिया है तेरी तरह — Ghulam Rabbani Taban

Ghazal

ज़िंदगी दिल पे 'अजब सेहर सा करती जाए इक जगह ठहरी लगे और गुज़रती जाए आँसुओं से कोई आवाज़ को निस्बत न सही भीगती जाए तो कुछ और निखरती जाए देखते देखते धुँदला गए मंज़र सारे तेरी ज़ुल्फ़ों की तरह शाम बिखरती जाए बात का राज़ खुले बात का अंदाज़ खुले तेरे होंटों से चले दिल में उतरती जाए रफ़्ता रफ़्ता किसी गुम-नाम लहू की तहरीर क़ातिल-ए-शहर के दामन पे उभरती जाए हो के बर्बाद चले सेहन-ए-चमन से निकहत दश्त-ओ-सहरा की मगर झोलियाँ भरती जाए मैं ने कब दावा-ए-इल्हाम किया है 'ताबाँ' लिख दिया करता हूँ जो दिल पे गुज़रती जाए — Ghulam Rabbani Taban