Habib Tanvir

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@habib-tanvir

Habib Tanvir shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Habib Tanvir's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
  • Nazm
बे-महल है गुफ़्तुगू हैं बे-असर अशआर अभी
ज़िंदगी बे-लुत्फ़ है ना-पुख़्ता हैं अफ़्कार अभी

पूछते रहते हैं ग़ैरों से अभी तक मेरा हाल
आप तक पहुँचे नहीं शायद मिरे अशआर अभी

ज़िंदगी गुज़री अभी इस आग के गिर्दाब में
दिल से क्यूँ जाने लगी हिर्स-ए-लब-ओ-रुख़्सार अभी

हाँ ये सच है सर-ब-सर खोए गए हैं अक़्ल-ओ-होश
दिल में धड़कन है अभी दिल तो है ख़ुद-मुख़्तार अभी

क्यूँ न कर लूँ और अभी सैर-ए-बहार-लाला-ज़ार
मैं नहीं महसूस करता हूँ नहीफ़-ओ-ज़ार अभी
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Habib Tanvir
मैं नहीं जा पाऊँगा यारो सू-ए-गुलज़ार अभी
देखनी है आब-जू-ए-ज़ीस्त की रफ़्तार अभी

कर चुका हूँ पार ये दरिया न जाने कितनी बार
पार ये दरिया करूँगा और कितनी बार अभी

घूम फिर कर दश्त-ओ-सहरा फिर वहीं ले आए पाँव
दिल नहीं है शायद इस नज़्ज़ारे से बे-ज़ार अभी

काविश-ए-पैहम अभी ये सिलसिला रुकने न पाए
जान अभी आँखों में है और पाँव में रफ़्तार अभी

ऐ मिरे अरमान-ए-दिल बस इक ज़रा कुछ और सब्र
रात अभी कटने को है मिलने को भी है यार अभी

जज़्बा-ए-दिल देखना भटका न देना राह से
मुंतज़िर होगा मिरा भी ख़ुद मिरा दिल-दार अभी

होंगी तो इस रह-गुज़र में भी कमीं-गाहें हज़ार
फिर भी ये बार-ए-सफ़र क्यूँ हो मुझे दुश्वार अभी
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Habib Tanvir
ख़लिश-ओ-सोज़ दिल-फ़िगार ही दी
दिल में शमशीर आब-दार ही दी

बेवफ़ा से मुआमले के लिए
इक तबीअत वफ़ा-शिआर ही दी

कैफ़ियत दिल की ब्यान करने को
एक आवाज़ दिल-फ़िगार ही दी

ख़ार को तो ज़बान-ए-गुल बख़्शी
गुल को लेकिन ज़बान-ए-ख़ार ही दी

दिल शब-ए-ज़िंदा-दार हम को दिया
हुस्न को चश्म-ए-पुर-ख़ुमार ही दी

ख़ुद रक़ीबों के वास्ते मैं ने
ज़ुल्फ़ माशूक़ की सँवार ही दी

क्या नशेब-ओ-फ़राज़ थी 'तनवीर'
ज़िंदगी आप ने गुज़ार ही दी
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