Hafeez Tabassum shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Hafeez Tabassum's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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Nazm
कल मेरी दो नज़्में बाज़ार गईं जो जुड़वाँ बहनें थीं
मगर वापस नहीं लौटीं इन दिनों कर्फ़्यू के बाइ'स खुले-आम घूमना ममनूअ' था लेकिन मैं ने दिन की रफ़्तार से तेज़ भागते हुए शहर का चक्कर काटा रात के साए के डर से मस्जिदों में एलान करवाए गए मगर दहशत के बिस्तर में दुबके लोग कुछ नहीं जानते किस की फटी एड़ियों से रिसता ख़ून लकीरें खींच रहा है
आख़िर अफ़्सुर्दगी से दीवार में लगा टी वी आन किया सुपरमार्केट धमाके से उड़ा दी गई मैं भागता जा-ए-वक़ू'अ पहुँचा मगर पानी से मौत के निशान गटर में बहाए जा चुके थे
अब बे-यक़ीनी के सिगरेट फूँकता क़ब्रों के पास बैठा हूँ जहाँ बम धमाके में मिरी रूहें दफ़्न हैं मगर मेरी नज़्मों की क़ब्र कौन सी है कि मिट्टी के चेहरे से पहचान मुमकिन नहीं और मैं मरने से पहले कतबा लगाना चाहता हूँ यहाँ गुनहगार शाइ'र की बे-गुनाह नज़्में दफ़्न हैं
तारीख़ के आग़ाज़ से कुछ पहले इंसान ने तन्हाई से तंग आ कर
चार-दीवारी का ख़ौफ़ उतार फेंका उस ने पत्तों का लिबास ईजाद किया और हिफ़ाज़त के लिए नेज़ा भी
जब सफ़र की सोच पैदा हुई नक़्शा ईजाद कर लिया गया जिस में मंज़िल का कोई निशान नहीं था
जब दूर-दराज़ के सफ़र पर चलने का ख़्वाब नाज़िल हुआ जूते की दरयाफ़्त पहले हुई या फिर सवारी की इब्तिदाई तारीख़ ख़ामोश है
पानी के लिए मश्कीज़ा ईजाद हुआ और सफ़री-सामान के लिए गठरी जिस के ख़द्द-ओ-ख़ाल आज से मिलते-जुलते हैं गठरी में सब से पहले नक़्शा रखा गया और बूढ़ों की चंद नसीहतें भी और तन्हाई के फैलते ख़ौफ़ ने सात बर्र-ए-आज़म दरयाफ़्त कर लिए