Irshaad Kamil

Irshaad Kamil

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Irshaad Kamil shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Irshaad Kamil's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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  • Nazm
मैं किसी उजले गुलाबी दिन को
अपनी बंद मुठ्ठी खोल दूंगा
रख दूंगा चुपचाप एक लफ़्ज़
तुम्हारी दुधिया सी हथेली पर

जो ख़ुश्बू नहीं होगा
फिर भी महकेगा
चांदनी नहीं होगा
फिर भी चमकेगा
नशा नहीं होगा
फिर भी बहकेगा

तुम उस लफ़्ज़ को चुपचाप भरना चाहोगी
हाथों की लकीरों में
नहीं भर पाओगी मगर
फिर भी
वो उस लफ़्ज़ बस जायेगा तुम्हारी नस नस में...मैं किसी उजले गुलाबी दिन को
अपने बंद होंठ खोल दूंगा
तुम्हारी रेशमी सी पलकों पर
रख दूंगा धीमे से एक लफ़्ज़
जो नींद नहीं होगा
फिर भी बोझिल होगा
ख़्वाब नहीं होगा
फिर भी नाज़ुक होगा

आंसू नहीं होगा
फिर भी कोमल होगा
वो लफ़्ज़
सोख लेगा तुम्हारी सारी नींदें
उस लफ़्ज से रिस रिस कर
टपकते रहेंगे ख़्वाब
तुम्हारी आंखों में
जिनकी ताबीर ढूंढ़ नहीं पाओगी

तो फिर किसी उजले गुलाबी दिन को
मैं अपनी बंद मुठ्ठी नहीं खोलूंगा
वो एक लफ़्ज़ नहीं बोलूंगा
तुम्हारे सामने बैठ
चुपचाप
पी जाऊंगा चाय की प्याली में घोल कर
वो एक लफ़्ज़
और उजले गुलाबी दिन को
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