Javed Saba

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@javed-saba

Javed Saba shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Javed Saba's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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Sher

तेरा मेरा कोई रिश्ता तो नहीं है लेकिन मैं ने जो ख़्वाब में देखा है कोई देख न ले — Javed Saba
जाने वाले ने हमेशा की जुदाई दे कर दिल को आँखों में धड़कने के लिए छोड़ दिया — Javed Saba
मुझे तन्हाई की आदत है मेरी बात छोड़ें ये लीजे आप का घर आ गया है हाथ छोड़ें — Javed Saba
नया लिबास भी पहनो तो इस तरह पहनो जिन्हें नसीब नहीं है उन्हें नया न लगे — Javed Saba
देखे थे जितने ख़्वाब ठिकाने लगा दिए तुम ने तो आते आते ज़माने लगा दिए — Javed Saba
जो बे-तलब था उस की हमें जुस्तुजू रही जो मिलना चाहता था उसी से नहीं मिले — Javed Saba
उस ने आँचल से निकाली मेरी गुम-गश्ता बयाज़ और चुपके से मोहब्बत का वरक़ मोड़ दिया — Javed Saba

Ghazal

तुम से नहीं मिले तो किसी से नहीं मिले मिलना भी पड़ गया तो ख़ुशी से नहीं मिले दुनिया तो क्या कि ख़ुद से भी करते रहे गुरेज़ जब तक मिले किसी से किसी से नहीं मिले हम अपने दुश्मनों से गले मिल के आ गए जिस के लिए गए थे उसी से नहीं मिले आँखें वही तो हैं जो मुझे ढूँढ़ती रहें सूरत वही तो है जो किसी से नहीं मिले मिलने को ज़िंदगी में सभी कुछ मिला मगर तुम मिल गए तो लोग ख़ुशी से नहीं मिले जो बे-तलब था उस की हमें जुस्तुजू रही जो मिलना चाहता था उसी से नहीं मिले देखो ये दिल अभी से बयाबाँ-नवर्द है मिलना न हो जिसे वो अभी से नहीं मिले — Javed Saba
बड़ी मुश्किल से छुपाया है कोई देख न ले आँख में अश्क जो आया है कोई देख न ले ये जो महफ़िल में मेरे नाम से मौजूद हूँ मैं मैं नहीं हूँ मेरा धोका है कोई देख न ले सात पर्दों में छुपा कर उसे रक्खा है मगर दिल को अब भी यही धड़का है कोई देख न ले डर रहा हूँ कि सर-ए-शाम तेरी आँखों में मैं ने जो वक़्त गुज़ारा है कोई देख न ले हाथ नरमी से छुड़ाती हुई ख़ल्वत ने कहा ये जो ख़ल्वत है तमाशा है कोई देख न ले तेरा मेरा कोई रिश्ता तो नहीं है लेकिन मैं ने जो ख़्वाब में देखा है कोई देख न ले साथ चलना है तो ग़ैरों की तरह साथ न चल शहर का शहर शनासा है कोई देख न ले — Javed Saba