Jayant Parmar

Jayant Parmar

@jayant-parmar

Jayant Parmar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Jayant Parmar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Nazm
आ गई है रुत-बहार
सब्ज़ पत्ते सब्ज़ तितली सब्ज़ मंज़र इंतिज़ार
इत्र-आगीं हैं हवाएँ
पेड़ की गर्दन पे हँसता है तिरी यादों का हार
एक साया पेड़ पर चढ़ता हुआ
इक सितारा बादलों के आर-पार
चाँद दरिया पार कर के आ रहा है
तुम से मिलने बे-क़रार
शश-जिहत पर ख़ुशबुओं की भीड़ सी
बंद रखना तुम न अपने घर के द्वार
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अपने क़रीब
क़रीब-तर होता है
सिर्फ़ अँधेरा ही
बंद आँखों से देखो तो भी
साफ़ दिखाई देता है
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घोड़े की गर्दन की
सफ़ेद अयाल सी मौजें
अपने तेज़ नुकीले नाख़ुन
खबो रही हैं
चावल के दानों सी रेत के सीने में
सफ़ेद झाग उगलती मौजें
खींच के ले आती हैं कभी अपने बस्ते में
कत्थई भूरी, नीली यादें
और मिरे दिल के साहिल पर
बस्ता ख़ाली कर जाती हैं
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कभी कभी मन करता है
पतंग बन कर आसमान में उड़ने का
घर की टूटी छत पे चढ़ कर देखता हूँ
रंग-बिरंगी कई पतंगें
लेकिन नीले आसमान को
देख नहीं पाता हूँ मैं
दिखाई देती है बस मुझ को अपनी पतंग
आसमान और मिरे दरमियाँ
हाइल एक पतंग
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Jayant Parmar
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खूँटी पे लटके इक लैम्प की
पीली पीली रौशनी में
थकी थकी सी शाम की पीठ
दीवारों पर धुएँ के बादल की परतें
कमरे में लकड़ी का टूटा-फूटा टेबल
और पुरानी चार कुर्सियाँ
टेबल पर मिट्टी की प्लेट में उबले आलू की ख़ुश्बू
आलू की ख़ुश्बू में भीगा कोमल हाथ
और मिरी दोनों आँखें भी
ज़ाइक़ा लेती हैं आलू का रंगों में
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लौट रहा था
फूलों की घाटी से जब
सवार था मैं
जिस घोड़े पर
वो लुढका
मैं ने सोचा
उसे भी शायद
घर की याद ने घेर लिया है!
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ख़्वाबों की सरहद पे
नीला नीला एक समुंदर
तेरी आँखों जैसा
लहरों के नेज़ों पे बहती
जगमग जगमग चाँद सी रौशन
अपने प्यार की कश्ती
सात समुंदर से भी दूर
तूफ़ानों से खेलती
जल परियों से बातें करती
वापस लौट आई तो
साहिल की चमकीली रेत में
एक सितारा टूट गिरा था
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कैनवस को
कैमरे की आँख से तुम
देखते ही देखते उकता गए थे
इस ज़मीं और आसमाँ के
रंग को तू ने नए मअ'नी दिए
कैनवस पर रंग दो मिलते हैं ऐसे
अजनबी इंसाँ गले मिलते हों जैसे
और लकीरें धड़कनों सी
साँस लेती हैं तिरी तस्वीरें गोया!
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