Madhav Jha

Madhav Jha

@madhav-jha

Madhav Jha shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Madhav Jha's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

0

Content

7

Likes

0

Shayari
Audios
  • Ghazal
है गिला अपनी जगह और आशिक़ी अपनी जगह
दर्द-ए-दिल के साथ मिलने की ख़ुशी अपनी जगह

वस्ल हो या हिज्र हो कुछ होश रहता है कहाँ
लज़्ज़तें अपनी जगह हैं बे-ख़ुदी अपनी जगह

रूठ कर सीने से लगने वाले ने मुझ से कहा
प्यार है अपनी जगह और बे-रुख़ी अपनी जगह

उम्र जब तक मेहरबाँ है खुल के जीना चाहिए
मौत है अपनी जगह और ज़िंदगी अपनी जगह

मेरी ग़ज़लों पे मुक़र्रर कहते हैं सारे अदू
दुश्मनी अपनी जगह है शाइरी अपनी जगह
Read Full
Madhav Jha
जीना मुश्किल है यहाँ आसान सब से ख़ुद-कुशी
इस लिए लगती भली है ज़िंदगी से ख़ुद-कुशी

इश्क़ तो अब नाम है इस का था पहले ख़ुद-कुशी
इश्क़ करने वालों को मिलती है राह-ए-ख़ुद-कुशी

कौन देता है किसी को हौसला याँ जीने का
कह रहे इक दूसरे को कर ले प्यारे ख़ुद-कुशी

एक मुद्दत बा'द आए आज वो महफ़िल में जब
ज़िंदगी थी सामने फिर कैसे करते ख़ुद-कुशी

ज़िंदगी के तजरबे कैसे मिले याँ पर 'शकेब'
जो कि आख़िर ख़ुद से इक दिन कर ली तुम ने ख़ुद-कुशी

तन किसी के पास है तो दिल किसी के साथ में
सेज पर बैठे हुए वो कर रहे हैं ख़ुद-कुशी

जीने की हसरत नहीं रस्ता या मंज़िल भी नहीं
जी रहे हैं इस तरह बेहतर थी इस से ख़ुद-कुशी

क़तरा क़तरा मरने से ‘माधव’ है बेहतर बस यही
सोचता हूँ मैं लगा लूँ अब गले से ख़ुद-कुशी
Read Full
Madhav Jha
हो ज़माना उधर इधर हम तुम
एक-दूजे के दिल-जिगर हम तुम

दिल की मंज़िल के हम-सफ़र हम तुम
हो के दुनिया से बे-ख़बर हम तुम

आसमाँ से जो देखे चाँद कभी
चाँद को आए बस नज़र हम तुम

वस्ल की रात मुख़्तसर सी लगी
रहे बातों में रात भर हम तुम

आए कोई शिकन न चेहरे पर
रास्ते में मिलें अगर हम तुम

वक़्ती हर शय है इस जहाँ में पर
इश्क़ के दह्र में अमर हम तुम
Read Full
Madhav Jha
न ही रंज है न मलाल है
तेरे हिज्र का ये कमाल है

मैं बयाँ करूँ इसे किस क़दर
तेरे बिन जो गुज़रा ये साल है

वो जो आज चल रहे कजरवी
ये तो दुश्मनों की सी चाल है

मैं भटक रहा यूँही दर-ब-दर
तेरे इश्क़ ही में ये हाल है

कोई ज़ख़्म दे न सिवा तिरे
तिरा ऐसा ही तो ख़याल है
Read Full
Madhav Jha
दिल अगर बे-क़रार है तो है
तुम को भी मुझ से प्यार है तो है

अब गुज़ारो सुकून से दिन तुम
खोया मेरा क़रार है तो है

तुझ को क़िस्मत अता करे सावन
अश्क की याँ फुहार है तो है

तेरी राहें सजी हो फूलों से
मेरे जीवन में ख़ार है तो है

राह-ए-उल्फ़त से अब न लौटूँगा
मेरा दिल ही शिकार है तो है

ज़िंदगी पर नहीं यक़ीं मुझ को
मौत पे ए'तिबार है तो है

सच हमेशा अकेला रहता है
झूट की गर क़तार है तो है

ज़िंदगी बेवफ़ा नहीं लेकिन
मौत का इंतिज़ार है तो है
Read Full
Madhav Jha
न मुँह में इक निवाला जा रहा है
फ़क़त धोके में डाला जा रहा है

निकाला जा चुका हूँ दह्र से जब
तो क्यों दिल से निकाला जा रहा है

ये काफ़िर बस तुम्हें पाने की ख़ातिर
बहाने से शिवाला जा रहा है

तेरी यादें संजोता हूँ मैं ऐसे
कि जैसे साँप पाला जा रहा है

सफ़र मुश्किल समझिए बस वहाँ तक
जहाँ तक ये उजाला जा रहा है
Read Full
Madhav Jha
वो जिस के आने ही से बज़्म रौशनी से भर गई
कहाँ से आई थी यहाँ वो कौन थी किधर गई

बदन भले हसीन था मगर तू मेरे वस्ल से
ज़रा तो देख आइने में किस क़दर निखर गई

हर एक शय हुई तबाह हर किसी का दिल हलाक
जिधर कहीं भी एक दफ़ा हुस्न की नज़र गई

मैं फ़ाइलों में इस क़दर कई दिनों से उलझा था
क़ज़ा भी आई इंतिज़ार कर के थक के घर गई

अमीर के बयानों को ही मानते हैं सच सभी
ये मुफ़्लिसी तो देखो मेरा ही शिकार कर गई

अगन बढ़ाना चाहता था हिज्र की मैं जिस क़दर
उधर बहार आई और वो मेरा काम कर गई
Read Full
Madhav Jha