Obaidurrahman Niyazi

Obaidurrahman Niyazi

@obaidurrahman-niyazi

Obaidurrahman Niyazi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Obaidurrahman Niyazi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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  • Ghazal
पसंद ना-पसंद का कोई भी ज़ाबता नहीं
कभी भला भी है बुरा कभी बुरा बुरा नहीं

तो जैसे धूप में चमकता बर्फ़-पोश कोहसार
मैं काली रात का दिया तू मेरे हुस्न सा नहीं

वो हँसता बस्ता शख़्स था दिलों पे सब के नक़्श था
फिर एक दिन कहीं गया कहाँ गया पता नहीं

ये क्या हसीन बाग़ है यहाँ हैं कितनी तितलियाँ
वो एक क्यों नहीं यहाँ नहीं यहाँ मज़ा नहीं

तमाम रात जाग कर कटी है उस के वास्ते
मिरी सहर नहीं हुई वो मेहर तो दिखा नहीं

ये क्या अजीब इश्क़ है जो फ़ोन पर ही हो गया
क़राबतों का शौक़ ही दिलों में अब रहा नहीं

ये बज़्म-ए-शब सजा रहे हैं रंग रंग क़ुमक़ुमे
मगर ये कैसी बज़्म है कि इक भी दिल जला नहीं

सुना है मेरे बारे में छपी हैं आज सुर्ख़ियाँ
ये राएगाँ छपी हैं उन लबों ने गर पढ़ा नहीं
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Obaidurrahman Niyazi
जो मेरी रूह की गहराइयों में उतरा था
वो एक नर्म मुलाएम हवा का झोंका था

उस एक लम्स के बारे में क्या बताऊँ तुम्हें
ठिठुरती सर्दियों की तेज़ धूप जैसा था

मैं इक ज़मीन बना घूमता था जिस के सबब
वो एक गुल था मिरे चाँद पर जो खिलता था

वो एक बाग़ था जिस में थीं दो हसीं झीलें
मैं उन को देखते ही डूब डूब जाता था

उस एक क़स्र को अंदर से झाँकने की तलब
मिरी नज़र ने बड़ा सख़्त वक़्त काटा था

मैं उम्र भर के लिए ख़ुद को भूल बैठा था
कोई पुकार नहीं थी वो एक नश्शा था

मैं रौशनी से मिला था बस इतना याद रहा
फिर उस के बाद से चारों तरफ़ अंधेरा था

ये और बात कि वो मेरा हो नहीं पाया
ख़ुदा ने उस को मिरे वास्ते ही भेजा था
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