Parvez Muzaffar

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@parvez-muzaffar

Parvez Muzaffar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Parvez Muzaffar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
दोस्त है वो पीठ पर आएगा नेज़ा तान कर
भाई है तो जा मिरी रुस्वाई का सामान कर

वर्ना सीधे से अदा कर दे शराफ़त का ख़िराज
और आज़ादी की ख़्वाहिश है तो बढ़ एलान कर

तुझ को हक़-तलफ़ी का ये एहसास क्यों होने लगा
सारे अंधे बाँटते हैं रेवड़ी पहचान कर

आ गले मिल दर्द का रिश्ता है अपने दरमियाँ
इतने ज़ोरों से न हिन्दोस्तान पाकिस्तान कर

मेरे ग़म-ख़ाने को जैसे तू ने जल-थल कर दिया
मेहरबाँ बादल किसी सहरा को नख़लिस्तान कर

रौशनी रहती है तेरी शीश-महलों में सदा
चाँद प्यारे मेरी कुटिया पर कभी एहसान कर

उस ने पूछा तक नहीं 'परवेज़' हो किस हाल में
मैं तो उस के पास आ बैठा था अपना जान कर
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Parvez Muzaffar
जो मेरे गुनाहों पे नज़र रखते हैं
एल्बम में वही तितली के पर रखते हैं

ज़ुल्मत की समाअ'त में खुल पड़ता है
मज़लूम के अल्फ़ाज़ असर रखते हैं

किस वक़्त कहाँ कौन जलाता है चराग़
इतनी तो पतंगे भी ख़बर रखते हैं

हैं आबले काँटों के लिए पैरवी में
तारों के लिए दीदा-ए-तर रखते हैं

बातें वो भला कैसे करेंगे खुल कर
'परवेज़' मियाँ दिल में जो डर रखते हैं
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