Raaz Dehalvi

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Raaz Dehalvi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Raaz Dehalvi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
ज़रा सा बेवफ़ा सा हो गया हूँ
तिरी सोहबत की ये तासीर है क्या

कोई पत्ता तलक हिलता नहीं है
हवा के पैर में ज़ंजीर है क्या

तिरी नज़रों से भी क्या ख़ौफ़ खाना
नज़र तेरी कोई शमशीर है क्या

तिरे लिखे को मैं सच मान बैठूँ
ख़ुदा के हाथ की तहरीर है क्या
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Raaz Dehalvi
कुछ ऐसा भी नहीं मेरा अकेले दिल नहीं लगता
कोई जब साथ होता है सफ़र मुश्किल नहीं लगता

तुम्हारे साथ होने का मिला ये फ़ाएदा मुझ को
तुम्हारे साथ होता हूँ तो मैं जाहिल नहीं लगता

ख़ुदा की बात करता है बिना ज़िक्र-ए-मोहब्बत के
तू वाइज़ हो गया है पर अभी फ़ाज़िल नहीं लगता

तुम्हारी मुस्कुराहट के लिए जीना ज़रूरी है
वगर्ना ये जहाँ तो जीने के क़ाबिल नहीं लगता

नदी के दो किनारों की तरह हम साथ तो हैं पर
कभी साहिल के सीना से अजी साहिल नहीं लगता
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Raaz Dehalvi
सूखा सूखा दरिया का दिल होता है
प्यास बुझाना कितना मुश्किल होता है

जिस ने इश्क़ किया मुझ से सब को टोके
ज़ीस्त नहीं ये ज़ात में शामिल होता है

शाम हवा में याद तुम्हारी होती है
शाम को सीना बोझल बोझल होता है

बारिश तक बारिश को टाले रखता हूँ
पानी में फिर पानी शामिल होता है

उस ने मुझ को बोल दिया पहचाना नहीं
माज़ी से बढ़ कर मुस्तक़बिल होता है

मुझ को इक पागल के हवाले कर जाओ
खुल कर हँसने रोने का दिल होता है

वो मज़हब जो बस ख़तरे में रहता है
उस मज़हब से डर ही हासिल होता है
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Raaz Dehalvi
ख़ुद को दुनिया में झोंकना है मुझे
और फिर ख़ुद में लौटना है मुझे

मैं ने इस ज़िद में खो दिया सब कुछ
खो गया था जो ढूँढना है मुझे

तुम ने सोचा न मेरे बारे में
अपने बारे में सोचना है मुझे

लोग बातें बनाने लगते हैं
आब आँखों में रोकना है मुझे

इस से पहले कि प्यास मर जाए
इक समुंदर तो सोखना है मुझे
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Raaz Dehalvi
मसाइल ये भी हल कर देखता हूँ
कभी ख़ुद से निकल कर देखता हूँ

मिरे दिल तक कोई आता नहीं क्यों
चलो चेहरा बदल कर देखता हूँ

कभी गर ख़्वाब में देखूँ तुझे मैं
तो बिस्तर से उछल कर देखता हूँ

सुना इक आग सी तुझ में है तो फिर
किया ये तय की जल कर देखता हूँ

तुम्हारे साथ कब तक चल सकूँगा
चलो कुछ देर चल कर देखता हूँ
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Raaz Dehalvi
नए चराग़ चराग़ाँ तो ख़ैर क्या देंगे
बहुत हुआ तो कहीं आग ही लगा देंगे

अगर है इश्क़ तो हम साथ ले के जाएँगे
अगर है ख़्वाब तो वा'दा रहा भुला देंगे

सुना रहें हैं ये अख़बार राग दरबारी
हमारे क़त्ल को भी हादिसा बता देंगे

उदास रात भी तारे सजा के रखती है
उसे मिलेंगे तो कुछ हम भी मुस्कुरा देंगे

अभी तो दिल ही जलाते हैं यार सब मेरे
फिर एक दिन ये मिरा जिस्म भी जला देंगे
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