Rabab Rashidi

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Rabab Rashidi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rabab Rashidi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
धूप रुख़्सत हुई शाम आई सितारा चमका
गर्द जब बैठ गई नाम तुम्हारा चमका

हर तरफ़ पानी ही पानी नज़र आता था मुझे
तुम ने जब मुझ को पुकारा तो किनारा चमका

मुस्कुराती हुई आँखों से मिला इज़्न-ए-सफ़र
शहर से दूर न जाने का इशारा चमका

एक तहरीर कि जो साफ़ पढ़ी भी न गई
मगर इक रंग मिरे रुख़ पे दोबारा चमका

आज इक ख़्वाब ने फिर ज़ेहन में अंगड़ाई ली
और तूफ़ान में तिनके का सहारा चमका

साज़गार आने लगी थी हमें ख़ल्वत लेकिन
जी में क्या आई कि फिर ज़ौक़-ए-नज़ारा चमका

झिलमिलाने लगीं महफ़िल में चराग़ों की लवें
रुख़्सत ऐ हम-नफ़सो सुब्ह का तारा चमका
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Rabab Rashidi
जब कभी क़ाफ़िला-ए-अब्रर रवाँ होता है
शाख़-दर-शाख़ इक एहसास जवाँ होता है

बू-ए-गुल मौज-ए-सबा से ये कहे है देखो
कौन अब हम-सफ़र-ए-उम्र-ए-रवाँ होता है

ये तसव्वुर जो सहारा है मिरे जीने का
ये तसव्वुर भी किसी वक़्त गराँ होता है

दिन रहे चाहे पिघलने लगे सूरज से बदन
रात पर तो किसी क़ातिल का गुमाँ होता है

कितने लम्हे हैं जो बे-चेहरा चले जाते हैं
सोचने वाले को एहसास कहाँ होता है

कोई आँधी कि बुझा दे ये चराग़ों की क़तार
ज़ेहन में जलते हैं और घर में धुआँ होता है

अब न लहजे में वो गर्मी न वो आँखों में चमक
कोई ऐसे में भला दुश्मन-ए-जाँ होता है
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