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तू मोहब्बत नहीं समझती है
हम भी अपनी अना में जलते हैं
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जीत हूँ जश्न-ए-मुक़द्दर हूँ मैं
ठीक से देख सिकंदर हूँ मैं
ठीक से देख सिकंदर हूँ मैं
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कहा था क्या और क्या बने हो
अजब सा इक मसअला बने हो
अजब सा इक मसअला बने हो
हमारी मर्ज़ी कहाँ थी शामिल
तुम अपने मन से ख़ुदा बने हो
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जिन रस्तों से तुम गुज़रे हो
उन रस्तों को ईद मुबारक़
उन रस्तों को ईद मुबारक़
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