Sanaullah Zaheer

Sanaullah Zaheer

@sanaullah-zaheer

Sanaullah Zaheer shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sanaullah Zaheer's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

1

Content

6

Likes

15

Shayari
Audios
  • Sher(3)
  • Ghazal(3)

Sher

तुम्हारे सामने सच बोलने से रुक गए हैं हमें बताओ तुम्हें और क्या पसंद नहीं — Sanaullah Zaheer
तुम्हारे सामने सच बोलने से रुक गए हैं हमें बताओ तुम्हें और क्या पसंद नहीं — Sanaullah Zaheer
उस के कमरे से उठा लाया हूँ यादें अपनी ख़ुद पड़ा रह गया लेकिन किसी अलमारी में — Sanaullah Zaheer

Ghazal

अपनी मस्ती कि तेरे क़ुर्ब की सरशारी में अब मैं कुछ और भी आसान हूँ दुश्वारी में कितनी ज़रख़ेज़ है नफ़रत के लिए दिल की ज़मीं वक़्त लगता ही नहीं फ़स्ल की तैयारी में इक तअल्लुक़ को बिखरने से बचाने के लिए मेरे दिन रात गुज़रते हैं अदाकारी में ऐ ज़माने में तिरे अश्क भी रो लूँगा मगर अभी मसरूफ़ हूँ ख़ुद अपनी अज़ा-दारी में वो किसी और दवा से मेरा करता है इलाज मुब्तला हूँ मैं किसी और ही बीमारी में उस के कमरे से उठा लाया हूँ यादें अपनी ख़ुद पड़ा रह गया लेकिन किसी अलमारी में अपनी तामीर उठाते तो कोई बात भी थी तुम ने इक उम्र गँवा दी मेरी मिस्मारी में — Sanaullah Zaheer