Shahzad Nayyar

Shahzad Nayyar

@shahzad-nayyar

Shahzad Nayyar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shahzad Nayyar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

1

Content

3

Likes

82

Shayari
Audios
  • Sher(1)
  • Ghazal(2)

Sher

जब ज़रूरत थी उसी वक़्त मुझे क्यूँँ न मिला बस इसी ज़िद में गँवा बैठा हूँ पाया हुआ शख़्स — Shahzad Nayyar

Ghazal

कनार-ए-चश्म से देखा है ख़ौफ़ खाते हुए लरज़ती डोलती दुनिया को डूब जाते हुए किसी ने हम से न पूछा हमारे ख़्वाब का रंग ये रंग रंग के परचम हमें थमाते हुए है शोर-ख़ाना-ए-दुनिया गली के नुक्कड़ पर मैं कान बंद ही रखता हूँ आते-जाते हुए कोई तो आ के ख़बर ले कि बुझता जाता है फ़क़ीर शब के अँधेरे में दिन मिलाते हुए तुम्हारे पाँव जमें हैं सो तुम न समझोगे हयात कैसे गुज़रती है लड़खड़ाते हुए भला हो माह-ए-मुहब्बत की नूर-पाशी का हम ऐसे लोग भी जीते हैं जगमगाते हुए मैं दर्द-ए-हिज्र की शिद्दत से ख़ूब वाक़िफ़ हूँ सो आसरा तुम्हें देता हूँ डगमगाते हुए कभी-कभार सड़क पर मैं ख़ुद से मिलता हूँ किसी को छोड़ के आते किसी को लाते हुए — Shahzad Nayyar
मेरा नहीं तो वो अपना ही कुछ ख़याल करे उसे कहो कि तअल्लुक़ को फिर बहाल करे निगाह-ए-यार न हो तो निखर नहीं पाता कोई जमाल की जितनी भी देख-भाल करे मिले तो इतनी रिआयत अता करे मुझ को मेरे जवाब को सुन कर कोई सवाल करे कलाम कर कि मेरे लफ़्ज़ को सुहूलत हो तेरा सुकूत मेरी गुफ़्तुगू मुहाल करे बुलंदियों पे कहाँ तक तुझे तलाश करूँँ हर एक साँस पे उम्र-ए-रवाँ ज़वाल करे वो होंठ हों कि तबस्सुम सुकूत हो कि सुख़न तेरा जमाल हर इक रंग में कमाल करे मैं उस का फूल हूँ 'नय्यर' सो उस पे छोड़ दिया वो गेसुओं में सजाए कि पाएमाल करे — Shahzad Nayyar