Yadgar Husain Nashtar Khairabadi

Yadgar Husain Nashtar Khairabadi

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Yadgar Husain Nashtar Khairabadi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Yadgar Husain Nashtar Khairabadi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
फिर तेरी याद दिलाते हैं मुझे
लोग दानिस्ता सताते हैं मुझे

ज़ुल्फ़-बर-दोश नशीली आँखें
ऐ वो लूटे लिए जाते हैं मुझे

मैं ने ये ख़्वाब न देखा हो कहीं
वो मोहब्बत से बुलाते हैं मुझे

उन के अश्कों में भी अब तो 'नश्तर'
दिल के टुकड़े नज़र आते हैं मुझे
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Yadgar Husain Nashtar Khairabadi
सब कुछ मिरी क़िस्मत का तेरे दर के क़रीं है
जीना भी यहीं है मुझे मरना भी यहीं है

आलम से निराला है तेरे हुस्न का आलम
तू ख़ुद भी हसीं तेरी मोहब्बत भी हसीं है

वाइज़ की ज़बाँ और ये जन्नत के फ़साने
कम्बख़्त ने मय-ख़ाना तो देखा ही नहीं है

'नश्तर' को गुनाहों की जज़ा मिल के रहेगी
उस को तिरी रहमत पे भरोसा है यक़ीं है
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Yadgar Husain Nashtar Khairabadi
फ़रियाद नहीं शुक्र-ए-सितम करते रहेंगे
हम ख़ुद उन्हें मजबूर-ए-करम करते रहेंगे

का'बे को शिकायत है तो हो अपने ख़ुदा से
सज्दे तो दर-ए-यार पे हम करते रहेंगे

दुनिया को सुनाने के लिए शे'र की सूरत
जो हम पे गुज़रती है रक़म करते रहेंगे

मय-ख़ाना सलामत रहे हम दूर से 'नश्तर'
नज़्ज़ारगी-ए-दैर-ओ-हरम करते रहेंगे
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Yadgar Husain Nashtar Khairabadi
चाँद का नूर सितारों की ज़िया बन जाऊँ
सोचता हूँ कि तिरी बज़्म में क्या बन जाऊँ

साज़-ए-दिल-सोज़ की दिल-गीर सदा बन जाऊँ
तू बने नग़्मा तो मैं नग़्मा-सरा बन जाऊँ

ज़ौक़-ए-सज्दा का तक़ाज़ा है कि दर पर तेरे
इतना मिट जाऊँ कि नक़्श-ए-कफ़-ए-पा बन जाऊँ

यूँ ही देता रहे आवाज़ अगर दिल 'नश्तर'
अपनी मंज़िल का मैं ख़ुद राह-नुमा बन जाऊँ
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Yadgar Husain Nashtar Khairabadi
सर तेरे आस्ताँ पे झुकाए हुए है हम
या'नी फ़राज़ अर्श पे छाए हुए है हम

हासिल हमें है लुत्फ़-ए-बहार-ए-जमाल-ए-दोस्त
मय-ख़ाना आज सर पे उठाए हुए है हम

गुम-कर्दा राह-ए-का'बा-ओ-बुत-ख़ाना से अब दूर
इन मंज़िलों की ख़ाक उड़ाए हुए हैं हम

आ शैख़ मय-कदे में तेरी आक़िबत ब-ख़ैर
रहमत को बोतलों में छुपाए हुए हैं हम

'नश्तर' तसव्वुर-ए-रुख़-ए-ताबाँ है रात-दिन
ग़म को बहुत हसीन बनाए हुए हैं हम
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Yadgar Husain Nashtar Khairabadi