Yaseen Barari

Yaseen Barari

@yaseen-barari

Yaseen Barari shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Yaseen Barari's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
मोहब्बत करने वालों की इनायत भी ज़रूरी है
जो है सच्ची मोहब्बत तो सदाक़त भी ज़रूरी है

मुसलमाँ हो कि हिन्दू हो यहूदी हो कि ईसाई
ख़ुदा के एक इक बंदे पे ताअ'त भी ज़रूरी है

गुनह कोई अगर हो जाए तुम से जाने अनजाने
बहाना अश्क तुम बेहद नदामत भी ज़रूरी है

ख़ुदा का वास्ता ज़ालिम को दे कर पहले समझाओ
जो न माने किसी से तो अदावत भी ज़रूरी है

ज़माने भर के शोबों में सबक़ ईमान का देना
अगर है सुर्ख़-रू होना सदाक़त भी ज़रूरी है

निकल आओ ग़म-ए-ज़ब्त-ए-अलम से आज फिर 'यासीन'
मज़ालिम ढाने वालों से बग़ावत भी ज़रूरी है
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Yaseen Barari
ये जो अहबाब हैं मेरे सभी कतराने लगते हैं
न जाने इस ग़रीबी से ये क्यों घबराने लगते हैं

जो सच कहता हूँ मैं तो क्यों बुरा लगता है लोगों को
हर इक जानिब से जो पत्थर मिरे घर आने लगते हैं

जो क़ातिल हैं वो फिरते हैं शरीफ़ों की तरह लेकिन
सितम क्यों बे-गुनाहों पर सितम-गर ढाने लगते हैं

अमीर-ए-शहर जब देखो पड़ा है ऐश-ओ-इशरत में
ग़रीबी के मगर दिन कब उसे याद आने लगते हैं

गुज़ारी साथ में जिन के ख़ुशी की हर घड़ी मैं ने
न जाने क्यों मिरे महबूब अब शरमाने लगते हैं

बुराई इस क़दर दुनिया में बढ़ती जाए है 'यासीन'
जिधर देखो उधर मयख़ाने ही मयख़ाने लगते हैं
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Yaseen Barari
इंसान से इंसान को नफ़रत नहीं अच्छी
एहसान जताने की भी आदत नहीं अच्छी

भाई की बुराई जो किया करता है हर दम
हर ऐसे मुनाफ़िक़ की मोहब्बत नहीं अच्छी

ज़िल्लत के सिवा और न कुछ उस को मिलेगा
मक्कार-ओ-गुनहगार की सोहबत नहीं अच्छी

करता है अमानत में ख़यानत जो सरासर
हर ऐसे बशर से कोई निस्बत नहीं अच्छी

आए न कभी काम ग़रीबों के तो ऐ दोस्त
अम्बार हो दौलत का वो दौलत नहीं अच्छी

गुलशन के सँवरने में लहू हम ने दिया है
हक़दार-ए-गुलिस्ताँ से बग़ावत नहीं अच्छी

इंसाफ़ ग़रीबों को जो मुंसिफ़ न दिलाए
हो ऐसी जहाँ पर वो अदालत नहीं अच्छी

'यासीन' जो फ़ितरत है बदलती नहीं लेकिन
है वक़्त बदल जो तिरी आदत नहीं अच्छी
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Yaseen Barari