काँटों से फूलों सी बातें करती है
सहरा से दरिया की बातें करती है
पहले वो कितनी कम बातें करती थी
और अब तो वो कितनी बातें करती है
उसकी दोनों आँखें फिर भर आती हैं
जब भी उस किस्से की बातें करती है
मैं उसके होंठों को तकता रहता हूँ
वो जब भी जैसी भी बातें करती है
इक लड़की है जो इकदम घर जैसी है
वो बिल्कुल माँ जैसी बातें करती है
जपती है कान्हा कान्हा ही सारा दिन
वो लड़की राधा सी बातें करती है
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