Meaning of

आश्कार

aashkaar • آشکار

प्रकट; स्पष्ट; जाहिर

revealed; manifest; apparent

ظاہر; واضح; عیاں

Persian

जहाँ देखो वहाँ मौजूद मेरा कृष्ण प्यारा है उसी का सब है जल्वा जो जहाँ में आश्कारा है — Bhartendu Harishchandra
बैठ कर तो सुकूत से हम भी रोज़ ही आश्कार बनते क्यूँँ — Vinod Ganeshpure
शब-ए-फ़िराक़ में अश'आर आशकार हुए मुझे नहीं है सनम तुझ सेे अब गिला कोई — Amaan Pathan
कितने ऐश-ओ-निशात के दिन थे कुछ भी जब आशकार था ही नहीं — Meem Maroof Ashraf

'आश्कार' शब्द एक उद्घाटन की भावना को जगाता है, जहाँ छिपे हुए सत्य या भावनाएँ उजागर होती हैं। कविता में, यह अक्सर उस क्षण को दर्शाता है जब रहस्य के पर्दे उठ जाते हैं और भीतर की सच्चाई प्रकट होती है।

'आश्कार' का उपयोग कवि स्पष्टता या उद्घाटन के क्षणों को दर्शाने के लिए करते हैं। यह उन शब्दों के विपरीत होता है जो छिपाव या अस्पष्टता का सुझाव देते हैं। अक्सर प्रेम, सत्य या दिव्य अंतर्दृष्टि के संदर्भ में उपयोग किया जाता है।

अपने सार में, 'आश्कार' अंधकार से प्रकाश की यात्रा है, आत्मा के गहरे सत्य का काव्यात्मक उद्घाटन।