Meaning of

आसेब-ज़दा

aaseb-zada • موتی

भूत-प्रेत से ग्रस्त; प्रभावित

haunted; afflicted

پریشان; متاثر

Persian

तुम पर जँचता है भोलापन
माथे पर बिंदी के जैसे

0

Download Image

आँसू हमारे गिर गए उन की निगाह से
इन मोतियों की अब कोई क़ीमत नहीं रही

22

Download Image

जो मोतियों की तलब ने कभी उदास किया
तो हम भी राह से कंकर समेट लाए बहुत

9

Download Image

पुतलियों में घुला समुंदर है
मोतियों की दुकान आँखें हैं

आप तहक़ीक़ ही नहीं करते
सब ख़ज़ानों की खान आँखें हैं

3

Download Image

चला आया मकाँ ख़ाली करा कर मैं
जले हैं आशियाने बे-ज़बाँ के भी

3

Download Image

है वही कश्ती पुरानी है वही दरिया मेरा
जिस पे तू आने न पाया है वही रस्ता मेरा

मैं मिरी मसरूफ़ियत से तंग आ जाता हूँ दोस्त
मुझ को सीने से लगा के वक़्त कर ज़ाया' मेरा

अपनी वहशत का तक़ाज़ा ढूंढता हूँ दर-ब-दर
ले गया है कोहकन जिस रोज़ से तेशा मेरा

याद कर कूचा-नवर्दी,याद कर उल्फ़त के दिन
याद कर बातें मेरी और याद कर चेहरा मेरा

जब हवाएँ थक गईं थीं कोशिशें कर दश्त में
रेत तब रक्साँ हुई थी चूम कर साया मेरा

बारिशों को मौसमों का खेल सब कहते हैं पर
रो पड़े थे अब्र-पारे जान कर क़िस्सा मेरा

आँख वो हँसती रही तो खिल उठे सूखे गुलाब
आँख वो रोने लगी तो रो पड़ा सहरा मेरा

ख़ुसरवान-ए-शहर मैं हो जाऊँगा इक लम्स से
और फ़क़त इक दीद से भर जाएगा कासा मेरा

मैं किताबों के जहाँ का एक ख़ुशक़िस्मत किताब
नाव बच्चों ने बनाया फाड़ कर सफ़्हा मेरा

उस नज़र को ख़्वाहिशों का शौक़ दे मेरा ख़याल
उस जबीं को रौशनी देता रहे बोसा मेरा

मैं मुसलसल बंद करता हूँ मगर फिर दम-ब-दम
याद उस की खोलती जाती है दरवाज़ा मेरा

0

Download Image

मुक़द्दर तो भरा है मोतियों से
कमी है सिर्फ़ तेरी कोशिशों की

0

Download Image

क्यूँ कोई कोख जो सूनी हो वो शर्मिंदा हो
क्या ज़रूरी है कि हर सीप से मोती निकले

0

Download Image

माँ की गाली देकर हिट हो जाते हैं
इस कलयुग में कौआ मोती खाता है

0

Download Image

वो जब यहाँ था तो हम देखते न थे उस को
वो जा रहा है तो हम खिड़कियाँ बदलते हैं

0

Download Image

तुम पर जँचता है भोलापन
माथे पर बिंदी के जैसे

0

Download Image

आँसू हमारे गिर गए उन की निगाह से
इन मोतियों की अब कोई क़ीमत नहीं रही

22

Download Image

अपने मूल अर्थ में, 'आसेब-ज़दा' एक ऐसी जगह या व्यक्ति की छवि प्रस्तुत करता है जो अदृश्य शक्तियों से प्रभावित है, अक्सर एक भयावह भावना के साथ। कविता में, यह उस आंतरिक उथल-पुथल और भूतिया यादों को दर्शाता है जो आत्मा में बनी रहती हैं।

'आसेब-ज़दा' का उपयोग कवि अक्सर उन पात्रों का वर्णन करने के लिए करते हैं जो अपने अतीत से प्रेतवाधित होते हैं। यह उदासी और अनसुलझे संघर्ष की भावना को व्यक्त करता है। यह उन शब्दों के विपरीत है जो स्पष्टता या शांति का सुझाव देते हैं।

आसेब-ज़दा अपने ही साये में फंसे होने का सार पकड़ता है, अतीत की पकड़ की एक मार्मिक याद दिलाता है।