Meaning of

आह-ओ-फ़ुग़ाँ

aah-o-fughaan • آہ و فغاں

आहें और विलाप; दुःख की पुकार

sighs and lamentations; cries of sorrow

آہیں اور فغاں; غم کی پکار

Persian

कहाँ जा के ये अश्क अपने बहाऊँ मक़ामात-ए-आह-ओ-फ़ुग़ाँ ही नहीं है — Prit
हाल-ए-दिल दीवार-ओ-दर से यूँँ बयाँ करते रहे रात भर रह रह के हम आह-ओ-फ़ुग़ाँ करते रहे — Shadab Shabbiri
आशिक़ों का यही अफ़साना है और कुछ भी नहीं कुछ न कर पाएँ तो वो आह-ओ-फ़ुग़ाँ तक पहुँचे — divya 'sabaa'

यह वाक्यांश उस गहरे, गूंजते हुए दुःख की ध्वनि को व्यक्त करता है जो हृदय के मूल से निकलती है। कविता में, यह मानव पीड़ा के सार और दर्द से राहत की सार्वभौमिक पुकार को पकड़ता है।

कवि अक्सर इस वाक्यांश का उपयोग भावनात्मक उथल-पुथल की गहराई को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह निराशा के क्षणों में आत्मा की पुकार का रूपक है। आनंद के क्षणों के साथ इसका विरोधाभास मानव भावनाओं की क्षणभंगुर प्रकृति को उजागर करता है।

अपने विलाप में, यह वाक्यांश आनंद और दुःख के शाश्वत नृत्य को पकड़ता है। यह हमें लालसा और राहत के साझा मानव अनुभव की याद दिलाता है।