चार सू आह-ओ-फ़ुग़ाँ है दर्द हैमुश्किलों में मुब्तिला हर फ़र्द हैवक़्त के हाकिम की नज़रों में शजरजो भी हक़ माँगे वो दहशत-गर्द है— Shajar Abbas