Meaning of

कँवल

kanwal • کنول

कमल; पवित्रता; सुंदरता

lotus; purity; beauty

کنول; پاکیزگی; خوبصورتی

Sanskrit

एक सुनहरा सपना देखा वो भी पल में टूट गया
यूँँ लगता है भँवरे का दम एक कँवल में टूट गया

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मुझ को ख़्वाहिश है उसी शान की दिवाली की
लक्ष्मी देश में उल्फ़त की शब-ओ-रोज़ रहे

देश को प्यार से मेहनत से सँवारें मिल कर
अहल-ए-भारत के दिलों में ये 'कँवल' सोज़ रहे

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तुम जो हँसती हो तो मस्ताना कँवल लगती हो
'मीर' का शे'र हो 'ग़ालिब' की ग़ज़ल लगती हो

संग-ए-मरमर से तराशा हुआ शफ़्फ़ाफ़ बदन
साँस लेता हुआ इक ताजमहल लगती हो

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ऐ जाँ यूँँ ही तुम को कँवल लिख रहा हूँ
तुम्हारे लिए मैं ग़ज़ल लिख रहा हूँ

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कँवल से है रुख़ और नदी सी अधर है
ख़ुदा की क़सम तेरा मुखड़ा ग़ज़ब का

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फूल शादाब आजकल खिलते
चैत बैसाख में कँवल खिलते

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कँवल जैसा तुम्हारा चेहरा गर आँगन में हो मेरे
तो फिर ये घर ख़ुदारा घर नहीं गुलदान हो जाए

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हुनर ये इश्क़ करने के किताबों में नहीं मिलते
कँवल हैं दिल के कीचड़ के ये काग़ज़ पर नहीं खिलते

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एक सुनहरा सपना देखा वो भी पल में टूट गया
यूँँ लगता है भँवरे का दम एक कँवल में टूट गया

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मुझ को ख़्वाहिश है उसी शान की दिवाली की
लक्ष्मी देश में उल्फ़त की शब-ओ-रोज़ रहे

देश को प्यार से मेहनत से सँवारें मिल कर
अहल-ए-भारत के दिलों में ये 'कँवल' सोज़ रहे

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कमल एक ऐसा फूल है जो कीचड़ से निकलकर भी अपनी पवित्रता और सुंदरता बनाए रखता है। कविता में यह शांति और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक बनता है।

कवि अक्सर 'कँवल' का उपयोग अराजकता के बीच पवित्रता के प्रतीक के रूप में करते हैं। यह जिस कीचड़ से उभरता है, उसके विपरीत, यह दृढ़ता और आंतरिक सुंदरता को दर्शाता है।

कँवल सुंदरता और दृढ़ता का विरोधाभास है। यह हमें सबसे अप्रत्याशित स्थानों में पवित्रता की संभावना की याद दिलाता है।