Meaning of

कँवल

kanwal • کنول

कमल; पवित्रता; सुंदरता

lotus; purity; beauty

کنول; پاکیزگی; خوبصورتی

Sanskrit

ऐ जाँ यूँँ ही तुम को कँवल लिख रहा हूँ तुम्हारे लिए मैं ग़ज़ल लिख रहा हूँ — Danish Balliavi
फूल शादाब आजकल खिलते चैत बैसाख में कँवल खिलते — Manohar Shimpi
हुनर ये इश्क़ करने के किताबों में नहीं मिलते कँवल हैं दिल के कीचड़ के ये काग़ज़ पर नहीं खिलते — Aditya
कँवल से है रुख़ और नदी सी अधर है ख़ुदा की क़सम तेरा मुखड़ा ग़ज़ब का — Sachin kumar
कँवल जैसा तुम्हारा चेहरा गर आँगन में हो मेरे तो फिर ये घर ख़ुदारा घर नहीं गुलदान हो जाए — Nityanand Vajpayee
एक सुनहरा सपना देखा वो भी पल में टूट गया यूँँ लगता है भँवरे का दम एक कँवल में टूट गया — Sohil Barelvi

कमल एक ऐसा फूल है जो कीचड़ से निकलकर भी अपनी पवित्रता और सुंदरता बनाए रखता है। कविता में यह शांति और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक बनता है।

कवि अक्सर 'कँवल' का उपयोग अराजकता के बीच पवित्रता के प्रतीक के रूप में करते हैं। यह जिस कीचड़ से उभरता है, उसके विपरीत, यह दृढ़ता और आंतरिक सुंदरता को दर्शाता है।

कँवल सुंदरता और दृढ़ता का विरोधाभास है। यह हमें सबसे अप्रत्याशित स्थानों में पवित्रता की संभावना की याद दिलाता है।