Meaning of

ख़ता

KHataa • خطا

गलती; त्रुटि; दोष

mistake; error; fault

غلطی; خطا; قصور

Arabic

वो क्यूँँ न रूठता मैं ने भी तो ख़ता की थी
बहुत ख़याल रखा था बहुत वफ़ा की थी

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तेरी ख़ता नहीं जो तू ग़ुस्से में आ गया
पैसे का ज़ो'म था तेरे लहजे में आ गया

सिक्का उछालकर के तेरे पास क्या बचा
तेरा ग़ुरूर तो मेरे काँसे में आ गया

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मैं चीख़ता रहा कुछ और भी है मेरा इलाज
मगर ये लोग तुम्हारा ही नाम लेते रहे

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ये तो कहिए इस ख़ता की क्या सज़ा
मैं जो कह दूँ आप पर मरता हूँ मैं

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फूल की आँख में शबनम क्यूँँ है
सब हमारी ही ख़ता हो जैसे

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क्या दुख है समुंदर को बता भी नहीं सकता
आँसू की तरह आँख तक आ भी नहीं सकता

तू छोड़ रहा है तो ख़ता इस
में तेरी क्या
हर शख़्स मेरा साथ निभा भी नहीं सकता

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हमीं तक रह गया क़िस्सा हमारा
किसी ने ख़त नहीं खोला हमारा

मुआ'फ़ी और इतनी सी ख़ता पर
सज़ा से काम चल जाता हमारा

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इस दौर-ए-मुंसिफ़ी में ज़रूरी नहीं 'वसीम'
जिस शख़्स की ख़ता हो उसी को सज़ा मिले

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तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं
सज़ाएँ भेज दो हम ने ख़ताएँ भेजी हैं

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बे-ख़ुदी में ले लिया बोसा ख़ता कीजे मुआ'फ़
ये दिल-ए-बेताब की सारी ख़ता थी मैं न था

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वो क्यूँँ न रूठता मैं ने भी तो ख़ता की थी
बहुत ख़याल रखा था बहुत वफ़ा की थी

30

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तेरी ख़ता नहीं जो तू ग़ुस्से में आ गया
पैसे का ज़ो'म था तेरे लहजे में आ गया

सिक्का उछालकर के तेरे पास क्या बचा
तेरा ग़ुरूर तो मेरे काँसे में आ गया

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'ख़ता' मूल रूप से गलती या त्रुटि को दर्शाता है, जो सही से अनजाने में भटकाव है। कविता में, यह शब्द मानव की असफलताओं का भार लिए होता है, जहाँ इरादे और क्रियाओं के बीच की नाजुकता को खोजा जाता है।

कवियों ने 'ख़ता' का उपयोग मानव क्रियाओं की नाजुकता को व्यक्त करने के लिए किया है। यह प्रायश्चित, क्षमा और जीवन की नैतिक जटिलताओं के विषयों में अक्सर दिखाई देता है।

'ख़ता' हमें हमारी साझा मानवीय अपूर्णताओं की याद दिलाता है, और हमारे चुने हुए रास्तों पर चिंतन का आमंत्रण देता है।