तेरी ख़ता नहीं जो तू ग़ुस्से में आ गयापैसे का ज़ो'म था तेरे लहजे में आ गयासिक्का उछालकर के तेरे पास क्या बचातेरा ग़ुरूर तो मेरे काँसे में आ गया— Mehshar Afridi