Meaning of

ख़द-ओ-ख़ाल

khud-o-khaal • خد و خال

नक़्श; रूपरेखा

features; contours

نقش; خدوخال

Persian

उम्र ये मेरी सिर्फ़ लबादा मेरे ख़द ओ ख़ाल का है मेरा दिल तो मुश्किल से कुछ सोलह सत्रह साल का है! — Vishal Bagh
वो हसीं चेहरा वो रुख़्सार वो दिलकश आँखें वो ख़द-ओ-ख़ाल भुलाने में ज़माने लगे हैं — Dharmesh bashar
तुझ को भी ग़म ने अगर ठीक से बरता होता तेरे चेहरे पे ख़द-ओ-ख़ाल हमारे होते — Kabir Athar
मिरी रौशनी तिरे ख़द्द-ओ-ख़ाल से मुख़्तलिफ़ तो नहीं मगर तू क़रीब आ तुझे देख लूँ तू वही है या कोई और है — Saleem Kausar

मूल रूप में 'ख़द-ओ-ख़ाल' चेहरे या वस्तु की भौतिक विशेषताओं या रूपरेखा को संदर्भित करता है। कविता में, यह सौंदर्य और पहचान के सार को व्यक्त करता है, जो किसी की उपस्थिति को परिभाषित करने वाले प्रकाश और छाया के नाज़ुक खेल को पकड़ता है।

'ख़द-ओ-ख़ाल' का उपयोग कवि अक्सर प्रिय के चेहरे के जटिल विवरणों का वर्णन करने के लिए करते हैं, उनके सौंदर्य के सार को पकड़ते हुए। यह व्यक्ति की गहरी पहचान और आत्मा का प्रतीक भी हो सकता है, जो मात्र भौतिक उपस्थिति से परे है।

कविता के क्षेत्र में, 'ख़द-ओ-ख़ाल' आत्मा की सुंदरता को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण बन जाता है। यह पाठक को सतह से परे देखने के लिए आमंत्रित करता है।