Meaning of

ख़सारे

khasaare • خسارے

हानियाँ; घाटे

losses; deficits

خسارے; نقصانات

Arabic

अशरफ़-उल-मख़्लूक़ आख़िर क्यूँ कहें इंसान को हम जब है फ़रमान-ए-ख़ुदा, बेशक ख़सारे में है इंसाँ — A R Sahil "Aleeg"
इश्क़ करने का बहुत था शौक़ तुम को रो रहे हो क्यूँ ख़सारे पर बिलख कर — A R Sahil "Aleeg"
जिस तरह लोग ख़सारे में बहुत सोचते हैं आज कल हम तिरे बारे में बहुत सोचते हैं — Iqbal kausar
मैं तो अपने ख़सारे पर भी हँसता हूँ समझ तो है तिजारत के उसूलों की — Hamza ali
इक तिरा दिल रखने में कितने ख़सारे हो गए जो भी थे बैअत में मेरे सब किनारे हो गए — Ali Mohammed Shaikh

'ख़सारे' शब्द दुःख और चिंतन का भार वहन करता है। यह जीवन में अपरिहार्य हानियों की बात करता है, चाहे वे भौतिक हों या भावनात्मक। कविता में, यह अक्सर अधूरी इच्छाओं और समय के बीतने की उदासी को दर्शाता है।

कवि 'ख़सारे' का उपयोग पछतावे और लालसा के विषयों का अन्वेषण करने के लिए करते हैं। यह अक्सर खोए हुए प्रेम या अधूरे सपनों के बारे में छंदों में दिखाई देता है। यह शब्द खुशी की क्षणभंगुर प्रकृति का प्रतीक भी हो सकता है।

कविता में, 'ख़सारे' जीवन की क्षणभंगुरता की याद दिलाता है। यह हानि में भी पाए जाने वाले सौंदर्य पर विचार करने के लिए आमंत्रित करता है।