अभी तो कूद रहे हो प जाँ से जाओगेमोहब्बतों के ख़सारें न झेल पाओगेअभी ये दोस्ती तुम को फ़ज़ूल लगती हैज़रा सी चोट लगी तो यहीं पे आओगे— Aqib khan