Meaning of

फ़ज़ूल

fazool • فضول

बेकार; अनावश्यक; तुच्छ

useless; unnecessary; trivial

بیکار; غیر ضروری; معمولی

Arabic

ऐ आसमान तेरी इनायत बजा मगर फ़स्लें पकी हुई हों तो बारिश फ़ुज़ूल है — Shahid Zaki
किसी ने कहा था टूटी हुई नाव में चलो दरिया के साथ आप की रंजिश फ़ुज़ूल है — Shahid Zaki
मिन्नत, कोशिश, अश्क-ओ-आह, फ़ुज़ूल है उफ़! ये उल्फ़त कितनी ऊल-जुलूल है — Saurabh Mehta 'Alfaaz'
उस लब से मिल ही जाएगा बोसा कभी तो हाँ शौक़-ए-फ़ुज़ूल ओ जुरअत-ए-रिंदाना चाहिए — Mirza Ghalib
मैं आप अपनी मौत की तय्यारियों में हूँ मेरे ख़िलाफ़ आप की साज़िश फ़ुज़ूल है — Shahid Zaki
जिस को फ़ुज़ूल लगती थी रब की इबादतें पाने को इश्क़ टूटते तारे पे आ गया — Om awasthi
तमाम उम्र मिटेगा नहीं वो रूह से फिर अगर किसी को कभी भी किसी का रंग लगा — Chandan Sharma
वा'दा कोई भी मुझ सेे निभाया नहीं गया या यूँँ कहें मिरी सभी बातें फिज़ूल थीं — Prashant Sitapuri

'फ़ज़ूल' मूल रूप से किसी ऐसी चीज़ का भाव देता है जो आवश्यकताओं से अधिक हो, जिसका कोई मूल्य या उद्देश्य न हो। कविता में, यह अक्सर अस्तित्वगत प्रश्नों की भावना को उजागर करता है, जहाँ जीवन के गहरे अर्थों के सामने कुछ प्रयासों या भावनाओं की तुच्छता को रेखांकित किया जाता है।

कवि 'फ़ज़ूल' का उपयोग भौतिक प्रयासों के मूल्य पर प्रश्न उठाने के लिए करते हैं। यह उन शब्दों के विपरीत है जो मूल्य या महत्व को दर्शाते हैं, जिससे यह चर्चा होती है कि वास्तव में क्या महत्वपूर्ण है।

कविता के क्षेत्र में, 'फ़ज़ूल' जीवन की क्षणिक तुच्छताओं की एक कोमल याद दिलाता है।