Meaning of

ख़ामी

khaami • خامی

ख़राबी; कमी; दोष

flaw; imperfection; shortcoming

خرابی; کمی; نقص

Arabic

ख़ामियों में गिनाए वो लम्हें
जिन
में कहता था हाँ इजाज़त है

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तिरी नज़रों से जो ख़ुद को अभी देखा हम ने
हर ख़ामी में मुझ को ख़ूबी नज़र आने लगी

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मुहब्बत में बहाएा ख़ून औ पानी कहा हम ने
तेरी हर ख़ामियों को हँस के नादानी कहा हम ने

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उस पे मरते हो तो उस की ख़ामियों से बैर क्यूँ
चाँद के आशिक़ के हिस्से दाग़ तो आएँगे ना

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ये सोच कर कि न समझे ग़लत उसे कोई
हज़ारों ख़ामियों से कर ली दोस्ती मैं ने

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मेरे हिस्से का आसमाँ दे दो
ख़ामियाँ ले लो ख़ूबियाँ दे दो

प्यार में सब को फ़ेल होना है
जितने भी चाहे इम्तिहाँ दे दो

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फ़क़त ख़ामी दिखी मेरी बिछड़ते वक़्त उस को
वो सारी ख़ूबियाँ मेरी कहीं दफ़ना चुकी थी

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मेरे हर इक ऐब उसे भा जाते है
वो मेरी ख़ामी अनदेखा करती है

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जो हैं ज़िंदा हैं उन
में बहुत ख़ामियाँ
मर गए हैं जो वे सब भले लोग थे

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लाख ख़ूबी हों चाहे ख़ामी हों
अपना शे'र अपना शे'र होता है

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ख़ामियों में गिनाए वो लम्हें
जिन
में कहता था हाँ इजाज़त है

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तिरी नज़रों से जो ख़ुद को अभी देखा हम ने
हर ख़ामी में मुझ को ख़ूबी नज़र आने लगी

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मूल रूप से 'ख़ामी' का अर्थ है कोई कमी या दोष, कुछ ऐसा जो अभी पूरा या परिपूर्ण नहीं है। कविता में, यह शब्द अक्सर जीवन और मानव स्वभाव के कच्चे, अपरिष्कृत पहलुओं को उजागर करता है, जो अपूर्णता में भी सुंदरता को दर्शाता है।

'ख़ामी' का उपयोग कवि भेद्यता और प्रामाणिकता के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह पूर्णता के विपरीत है, यह सुझाव देता है कि सच्ची सुंदरता अपरिष्कृत में निहित है। यह आत्म-सुधार की यात्रा का प्रतीक भी हो सकता है।

कविता में, 'ख़ामी' हमें याद दिलाती है कि अपूर्णता कोई दोष नहीं है, बल्कि हमारी मानवता का एक पहलू है। यह अधूरेपन की सुंदरता पर चिंतन के लिए आमंत्रित करती है।