Meaning of

ख़ुद-ग़रज़

khud-gharz • خود غرض

स्वार्थी; आत्मकेंद्रित

selfish; self-centered

خود غرض; خود مرکز

Persian

मुझ को न दिल पसंद न वो बे-वफ़ा पसंद दोनों हैं ख़ुद-ग़रज़ मुझे दोनों हैं ना-पसंद — Bekhud Dehelvi
ख़ुद-ग़रज़ दुनिया की तस्वीरों को आँखों में छुपाकर क्या कहें ज़िंदा है अब तक भी वफ़ा दिल में हमारे — arjun chamoli
नफ़रत धोका बुग़्ज़ तअ'स्सुब झूट दिखावा ख़ुद-ग़रज़ी कैसे कैसे ज़हर भरे हैं इंसाँ की शिरयानों में — Hina Rizvi
मैं ज़ीस्त में अपनी कभी ख़ुद ग़र्ज तो होता नहीं जो चाहिए दुनिया को मैं जो मर्द वो होता नहीं — Manoj Devdutt

ख़ुद-ग़रज़ शब्द स्वार्थ की भावना को दर्शाता है जो दूसरों की उपेक्षा तक पहुँच सकता है। कविता में, यह अक्सर व्यक्तिगत इच्छाओं और सामूहिक जिम्मेदारियों के बीच तनाव को उजागर करता है।

कवि 'ख़ुद-ग़रज़' का उपयोग अलगाव और नैतिक संघर्ष के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह परोपकारिता के विपरीत हो सकता है या एक चरित्र के आंतरिक संघर्ष को उजागर कर सकता है जो स्वयं और दूसरों के बीच फटा हुआ है।

अपनी काव्यात्मक सार में, 'ख़ुद-ग़रज़' पाठक को स्वार्थ और सहानुभूति के बीच संतुलन पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है।